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भोपाल में यहां डेढ़ साल से कुएं में मिल रहा था सीवेज, शिकायतें हुईं लेकिन कार्रवाई नहीं

Adampur Cantonment Water Contamination: भोपाल में साफ पानी का हक दम तोड़ रहा है। कचरे के पहाड़, सीवेज से भरे कुएं और निगम की चुप्पी ने आदमपुर छावनी से खानूगांव तक हजारों लोगों की जिंदगी को धीमे ज़हर के हवाले कर दिया है।
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भोपाल

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Akash Dewani

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Updated: 13 Jan 2026, 3:27 AM IST

Bhopal Garbage Dump Adampur Cantonment Water Contamination MP News

Adampur Cantonment Water Contamination (फोटो- Patrika.com)

MP News: भोपाल में राइट टू वॉटर केवल कागजों तक सीमित रह गया है। नगर निगम की आपराधिक लापरवाही शहर के कई इलाको आदमपुर छावनी, वाजपेयी नगर और खानूगांव आदि को नर्क में तब्दील कर दिया है। सरकारी जांच में इन क्षेत्रों के जल स्रोतों में जानलेवा ई-कोलाई जैसे बैक्टीरिया मिल रहे हैं।

यह वही बैक्टीरिया है जिसने हाल ही में इंदौर में 23 जिंदगियों को निगल लिया था। आदमपुर छावनी में हालात पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी जैसे है। यहां हर रोज 850 टन कचरा डंप (Garbage Dump) किया जाता है। 2018 के बाद से कचरे के पहाड़ से निकलने वाले लीचेट ने जमीन के भीतर के पानी को लाल और बदबूदार बना दिया है। (Adampur Cantonment Water Contamination)

खानूगांवः प्रदूषित पानी पी रहे रहवासियों का दर्द

बड़े तालाब के मुहाने पर बसे खानूगांव की हालत सबसे ज्यादा खौफनाक है। यहां एक पुराने कुएं से इलाके की बड़ी आबादी प्यास बुझाती थी। स्थानीय निवासी अशोक कुशवाहा और अरशद हुसैन का आरोप है कि पिछले डेढ़ साल से सीवेज का पानी रिसकर इस कुएं में मिल रहा था।

टैंकर पॉलिटिक्सःबूंद-बूंद को तरसते लोग

सरकारी टैंकरों की सप्लाई में भी भेदभाव का खेल जारी है। खानूगांव, अर्जुन नगर और आदमपुर के निवासियों का कहना है कि टैंकर केवल खास गलियों तक सीमित हैं। लोग 500 मीटर दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं। पाइप लाइन बिछी तो है, लेकिन उसमें पानी का दबाव इतना कम है कि वह घरों तक नहीं पहुंचता।

हर कदम पर लीपापोती

  • दिखावे की कार्रवाई: इंदौर में हुई मौतों के बाद जब हडकंप मचा, तब जाकर निगम ने कुएं की सप्लाई काटी।
  • स्वास्थ्य जांच नवारदःबैक्टीरिया की पुष्टि के बाद भी इलाके में मेडिकल कैंप नहीं लगाया, जबकि लोग बीमार होने की आशंका से डरे हुए हैं।
  • एनजीटी की फटकारःएनजीटी ने निगम को सख्त लहजे में 330 दिनों के भीतर कचरे के निपटान का अल्टीमेटम दिया है। लेकिन कुछ नहीं हुआ।
  • योजना बनाम हकीकतः यहां पांच लाख की लागत से बनी नल-जल योजना की टंकी पिछले पांच साल से बंद पड़ी है, जिससे सात हजार की आबादी अब सरकारी टैंकरों की मोहताज है। (MP News)

कचरा साफ करने की कोशिश जारी

टैंकरों से सप्लाई सुनिश्चित की जा रही है। आदमपुर में कचरा निस्तारण का काम जल्द पूरा करने की कोशिश जारी है। खानूगांव में भी उचित व्यवस्था की जा रही है।- संस्कृति जैन, आयुक्त, निगम