
भोपाल। कोलार रोड स्थित रातापानी से लगे घने जंगलों में मौजूद कैरी महादेव लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां 12 माह लगातार जल धारा बहती रहती है। यहां शिवलिंग स्थापित है, जहां आसपास के ग्रामीण दर्शन करने आते हैं। साल में एक बार यहां मेला भी लगता है। भोपाल से यह स्थान 24 किमी है।
पिछले कुछ साल से प्रसिद्ध होने की वजह से सैलानियों की संख्या बढ़ गई तो यह स्थल पिकनिक स्पॉट में बदल गया है। अब रोजाना काफी संख्या में लोग घूमने-फिरने के उद्देश्य से पहुंच रहे और खूबसूरत पल को मोबाइल, कैमरे में कैद करते हैं। सीहोर जिला मुख्यालय से 60 और इछावर के झिरी गांव से 10 किमी दूर स्थित कैरी का महादेव आसपास जंगल और पहाड़ से घिरा हुआ है।
वर्षों पुराना यह स्थान एक धरोहर के रूप में ही मिला है, जिसकी बड़ी खासियत सर्दी, गर्मी, बारिश के मौसम में गुफा के अंदर पत्थरों से अपने आप गिरता पानी है। इसे कुदरत का करिश्मा कहे या ईश्वर का वरदान जो पानी की धार कभी बंद नहीं होती।
छोटा-सा है शिवलिंग
कैरी के महादेव स्थान पर एक छोटा सा शिवलिंग भी है। सैलानी शिवलिंग का दर्शन कर पूजा-अर्चना जरूर करता है। यहां भोपाल, सीहोर, रायसेन तक से लोग पहुंचते हैं। सैलानियों की बढ़ती संख्या देखकर अब इस स्थान का कायाकल्प करने की मांग उठने लगी है। लोगों का कहना है कि पुरातत्व विभाग में इसे शामिल कर व्यवस्था जुटाई जाएं तो राजस्व बढ़ाने का एक नया विकल्प बन सकता है। उल्लेखनीय है कि बारिश का मौसम चालू होने के बाद से ही यहां हरा भरा वातावरण हो जाता है।
यह स्थान झिरी से 12 किमी दूर है
यह स्थान कोलार रोड पर स्थित बेतवा नदी के उद्गम से 12 किमी जंगल में है। यहां जाने के लिए रातापानी सेंचुरी के गेट में से जाना पड़ता है। यहां जाने के लिए चार पहिया वाहन को 750 रुपए देना पड़ता है। वहीं दो पहिया वाहन चालकों को 50 रुपए देना होता है। इसके अलावा पैदल ट्रैकिंग करने वालों के लिए 12 रुपए फीस तय की गई है। इस क्षेत्र में चीतल, लंगूर, नीलगाय, चौसिंगा, काला हिरण, लकड़बग्गा सियास, लोमड़ी और टाइगर भी रहते हैं।
Updated on:
20 Jun 2022 06:04 pm
Published on:
20 Jun 2022 05:59 pm

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