
भोपाल। न्यू सुभाष नगर निवासी अजय जैन ने अपने घर के पास फेंके जा रहे कचरे पर आपत्ति ली। नगर निगम में शिकायत की। सुनवाई नहीं हुई तो कोर्ट पहुंचे। यहां से निर्देश हुए कि कचरा फेंकना रोका जाए, लेकिन एेसा नहीं हो सका। जैन ने 25 नवंबर 2009 को पहली बार शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद 23 बार शिकायत कर चुके हैं।
अप्रैल 2012 में नवम व्यवहाकर न्यायाधीश की बेंच में मामला दर्ज कराया। ये तस्वीर उस शहर की सफाई के प्रबंधन की है, जिसे देश में दूसरा सबसे स्वच्छ शहर का तमगा मिला है। कचरा प्रबंधन के नाम पर सालाना करोड़ रुपए की राशि खर्च की जाती है।
स्वच्छता में बेहतर प्रदर्शन करने पर शहर के करीब आधा दर्जन सहायक स्वास्थ्य अधिकारी हाल में दिल्ली से अवार्ड लेकर भी लौटे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत ये हैं कि एक व्यक्ति की लगातार शिकायतों के बावजूद कचरा साफ नहीं करा पा रहे।
गौरतलब है कि संबंधित क्षेत्र के सहायक स्वास्थ्य अधिकारी अशोक माहेश्वरी है। ये सीएम हेल्पलाइन के साथ ही कोर्ट तक को झूठी जानकारी दे चुके हैं। अब तक गंदगी से क्षेत्र को मुक्त नहीं कर सके। मामले में प्रभारी अपर आयुक्त वीके चतुर्वेदी फिर से निर्देशित कर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
एेसे रहा शिकायतों का सिलसिला-
25 नवंबर 2009, 20 अप्रैल 2010 और 23 अगस्त 2010 को घर के पास कूड़ा करकट हटाने निगम प्रशासन से शिकायत।
30 अप्रैल 2013 में मामला कोर्ट में दाखिल हुआ।
31 दिसंबर 2013 को यहां से सहायक स्वास्थ्य अधिकारी को कचरा हटाने के आदेश हुए।
12 जनवरी 2014 को सहायक स्वास्थ्य अधिकारी ने कोर्ट को जवाब दिया, कचरा डालना बंद कर दिया।
02 और 24 अप्रैल को यही बात फिर से कोर्ट को जवाब में लिखी सहायक स्वास्थ्य अधिकारी ने।
10 नवंबर 2017 से 31 मई 2017 तक छह बार सीएम हेल्पलाइन पर मामले की शिकायत की।
नियमानुसार रहवासी क्षेत्र में किसी तरह की गंदगी नहीं फेंकी जा सकती। इसकी जिम्मेदारी संबंधित क्षेत्र के निगम अफसरों की होती है। बावजूद इसके घर के पास गंदगी और कचरा फेंका जा रहा। मैं लगातार शिकायत कर रहा हूं, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं हो रही।
- अजय जैन, शिकायतकर्ता
इधर,150 करोड़ से बनेगा सड़क प्राधिकरण :-
राजधानी की सड़कों का तीन एजेंसियों से लेकर एक प्राधिकरण को देने का शुरुआती बजट 150 करोड़ रुपए होगा। वित्त आयोग के समक्ष इस प्रस्ताव को रखने के साथ ही इसपर कवायद शुरू हो गई है। नगर निगम, सीपीए और पीडब्ल्यूडी को सड़कों के रखरखाव के लिए शासन अपने बजट में औसत 150 करोड़ रुपए देता है और ये ही राशि प्राधिकरण को स्थानांतरित कर दी जाएगी। वित्त आयोग फिलहाल इसके लिए अलग से कोई राशि प्रस्तावित नहीं करेगा।
इसका सीधा लाभ ये होगा कि शहर में सड़क का निर्माण और रखरखाव एक ही एजेंसी के हाथ में आ जाएगा। निगम सड़क निर्माण के लिए प्राधिकरण के माध्यम से ही काम कराएगा। वित्त आयोग के अध्यक्ष हिम्मत कोठारी के अनुसार शुरुआत मंजूरी के बाद नगरीय प्रशासन विभाग के माध्यम से विस्तृत योजना बनाकर आगे की मंजूरियों के लिए बढ़ाया जाएगा।
संभव है पीडब्ल्यूडी, सीपीए और निगम से प्रतिनियुक्ति पर इंजीनियर प्राधिकरण में लेकर इसका काम शुरू किया जाए। इसका काम अभी शुरू किया जाता है तो भी गठन होने में एक साल से अधिक लगेगा। महापौर आलोक शर्मा परियोजना प्रशासन को तो पूरी तरह खत्म करने के पक्षधर है। उनका कहना है कि राजधानी में इस तरह की एजेंसी की कोई जरूरत नहीं है।
ये होगा लाभ
सड़क के लिए अलग से एजेंसी बनने का लाभ ये होगा कि पीडब्ल्यूडी से शहर के भीतर की रोड का निर्माण और रखरखाव करने का दबाव कम हो जाएगा। नगर निगम भी सड़क निर्माण और रखरखाव की चिंता से मुक्त होकर साफ सफाई के साथ ही भवन निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर ध्यान दे पाएगा।
आशंका: कहीं बीडीए जैसा हाल न हो जाए
भोपाल सिटीजंस फोरम के म्यूनिसिपल विंग के सुरेंद्र तिवारी का कहना है कि सड़क का प्राधिकरण बनाकर शहर की सड़कों को एक ही एजेंसी के सुपुर्द करने की कवायद फौरीतौर पर तो दुरुस्त है, लेकिन इसका हाल बीडीए की तरह न हो जाए। बीडीए के पास भोपाल मास्टर प्लान लागू करने का जिम्मा है, लेकिन वह बिल्डर की तरह मकान और दुकान बनाकर बेच रहा है। पौने चार सौ कर्मचारियों का लंबा चौड़ा कुनबे का वेतन नहीं निकल पा रहा।
Published on:
19 Nov 2017 11:07 am

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