
भोपाल। मध्यप्रदेश की राजनीति में 20 मार्च का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया है। यह तारीख इसलिए अहम है क्योंकि इसी दिन कांग्रेस सरकार के लिए झकझोर देने वाली घटना हुई थी। 15 माह की सरकार के मुखिया कमलनाथ ने 20 मार्च 2020 को ही इस्तीफा दिया था। इससे आहत कांग्रेस हर साल 'लोकतंत्र सम्मान दिवस' मनाती है। इस बार भी कांग्रेस ने ऐसी ही तैयारी कर ली है।
कांग्रेस न तो इस तारीख को खुद भूलने वाली है न किसी को भूलने देगी। कांग्रेस 20 मार्च को लोकतंत्र सम्मान दिवस के रूप में मनाने वाली है। इस तारीख को राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के सभी जिलों में कांग्रेस कार्यकर्ता तिरंगा यात्राएं निकालेंगे। यह ब्लाक मुख्यालयों में निकाली जाएगी। भोपाल में प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में इंदिरा गांधी की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने के बाद बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा तक कांग्रेस पैदल मार्च निकालेगी।
मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के उपाध्यक्ष राजीव सिंह ने मीडिया को बताया कि सौदेबाजी, जोड़तोड़ और दलबदल जैसे अनैतिक कृत्यों से खुद को दूर रखकर भारतीय लोकतंत्र और बाबा साहेब अंबेडकर के बनाए संविधान के सम्मान में कमलनाथ ने मुख्यमंत्री का पद छोड़ दिया था।
बीजेपी की रक्षा के लिए सत्ता का त्याग किया और संविधान के मूल्यों की सही तस्वीर दिखाई। इस दिन कांग्रेस हर जिले में, ब्लाक स्तर पर तिरंगा यात्राएं निकालेगी। कांग्रेस के सभी कार्यकर्ता लोगों को बताएंगे कि कैसे कमलनाथ की सरकार गिराई गई थी। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस ने सभी जिला एवं ब्लाक कांग्रेस को आयोजन करने के संबंध में निर्देश भी दिए गए हैं।
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पिछले साल भी निकाली थी तिरंगा यात्रा
पिछली बार भी कांग्रेस ने 20 मार्च को तिरंगा यात्रा निकालकर लोकतंत्र सम्मान दिवस मनाया था। यह यात्रा हर जिले में निकाली गई थी, जिसमें भाजपा के खिलाफ नारेबाजी करते हुए बताया गया था कि किस तरह से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बगावत कर दी थी और डेढ़ साल में ही कांग्रेस की सरकार गिरा दी थी। 20 मार्च 2020 को कमलनाथ ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
तीन साल हो गए
अब से तीन साल पहले 10 मार्च 2020 को प्रदेश में सियासी घटनाक्रम तेजी से बदला। 17 दिनों तक यह घटनाक्रम चला। में 15 माह चली कमलनाथ सरकार को सत्ता से हाथ धोना पड़ा। सबसे बड़ा कारण था ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने 22 समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस छोड़ दी और भाजपा का दामन थाम लिया था। इसमें कमलनाथ सरकार के 6 मंत्री भी शामिल थे। इसके पीछे सिंधिया और कमलनाथ के बीच मनमुटाव प्रमुख वजह थी। कांग्रेस का वचन पत्र और सिंधिया का बयान अहम वजह सामने आई थी। सिंधिया ने एक कार्यक्रम में कहा था कि वचन पत्र के वादे पूरे नहीं हुए तो वे सड़क पर उतर जाएंगे, उनके बयान के बाद कमलनाथ का बयान आया था कि उतर जाएं। बस यहीं से दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगी और अंततः कमलनाथ को सरकार से हाथ धोना पड़ा।
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Updated on:
17 Mar 2023 06:11 pm
Published on:
17 Mar 2023 06:06 pm

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