
कपट और हिंसा पर प्रेम की विजय
भोपाल। शहीद भवन में कर्मयोगी क्रिएटिव ग्रुप द्वारा मंगलवार को नाटक 'पर्णिका' का मंचन किया गया। इस नाटक का लेखन व निर्देशन नितिश दुबे ने किया गया।
एक घंटे 10 मिनट के इस नाटक में एक-दूसरे के प्रति कपट, क्रूरता और हिंसा पर सत्य और प्रेम की विजय को दर्शाया गया। जिसे काव्य छन्द के माध्यम से प्रस्तुति किया गया।
नाटक की कहानी राजा अथर्व की है। वे युद्ध विजय करने के बाद अपने राज्य लौट रहे होते हैं। रात होने पर वे जंगल में ही विश्राम के लिए रूक जाते हैं।
भ्रमण के दौरान उनकी नजर वन की राजकुमारी पर्णिका पर पड़ती है। दोनों को एक-दूसरे से प्रेम हो जाता है। राजा, सेना का राज्य लौटने का आदेश देते हैं और स्वयं कुछ दिन पर्णिका के साथ वन में ही रूक जाते हैं।
राजपुरोहित क्रोधित होकर राजा को वापस लौटने का आदेश देते हैं। पहले तो राजा सकते में पड़ जाते हैं कि राजपुरोहित ऐसा क्यों कह रहे हैं। आखिरकार राजा राजपुरोहित की बात मानकर राज्य लौटने का निर्णय लेते है और पर्णिका को पालकी में ले जाने का वचन देकर राज्य में चले जाते है और वहां जाकर राजपुरोहित को सारी बात बताते हैं।
राजपुरोहित दोनों की कुंडली बनाने का ढोंग करता है, और राजा को बताता है कि पर्णिका से विवाह करते ही राजा की मृत्यु हो जाएगी।
राजपुरोहित करता है षडयंत्र
नाटक की अगली कड़ी में दिखाया कि राजा का मित्र भेला राजपुरोहित के षडय़ंत्र समझ जाता है और राजा को सब कुछ बता देता है। राजा पर्णिका को लेने वन जाने लगते है।
वहीं, राजपुरोहित अपने जादू से मायावी राक्षसों को बनाता है। राजा और राक्षसों में युद्ध होता है, और राजा की विजय होती है। राजा राजपुरोहित को मृत्यु दंड देते है। राजकुमारी पर्णिका को पालकी पर बैठाकर अपने राज्य ले जाता है।
Updated on:
23 Oct 2019 06:35 am
Published on:
23 Oct 2019 06:20 am
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