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मध्यप्रदेश के प्रमुख चर्च, प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर जानिये इनका अनुठा इतिहास

क्रिसमस पर्व ( christmas Day ) को लेकर जोरदार तैयारियां शुरू...

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church of MP

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भोपाल। 25 दिसंबर को पूरी दुनिया में क्रिसमस डे ( christmas ) मनाया जाता है। इसी प्रकार प्रभु यीशु के जन्मदिन के मौके पर पूरे मध्य प्रदेश में भी क्रिसमस धूमधाम से मनाया जाता है।

इस दौरान विभिन्न शहरों में क्रिसमस पर्व ( christmas festival ) को लेकर जोरदार तैयारियों के बाद कार्यक्रम किए जाते हैं। स्कूल, बाजार, घरों से लेकर रेस्टोरेंट में भी क्रिसमस के दिन धूम रहती है।

वहीं चर्च और घरों में प्रभु ईशु का स्वागत किया जाता हैं। इस समय बाजारों में रंग-बिरंगी सीरीज, कैंडल, स्टार, क्रिसमस ट्री सहित अन्य गिफ्ट आयटम की दुकानें भी सजकर तैयार रहती हैं।

मिशनरी स्कूलों में भी क्रिसमस ( christmas ) सेलीब्रेशन में बच्चे सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं। वहीं विभिन्न चर्च में भी विशेष सजावट की जाती है। इस बार यानि 2019 में भी बुधवार के दिन 25 दिसंबर को क्रिसमस डे मनाया जाएगा।

ऐसे में आज हम आपको मध्यप्रदेश के प्रमुख जिलों के चर्च ( famous Church ) के बारे में बता रहे हैं। जिनका एक ओर अनुठा इतिहास है तो वहीं ये अपने आप में अद्भुत हैं।

रेड चर्च, इंदौर: red church indore
यह चर्च अस्सी कैथेड्रल के सेंट फ्रांसिस ( St. Francis ) के रूप में भी जाना जाता है, लाल चर्च इंदौर शहर में एक प्रतिष्ठित इमारत है। इंदौर में सबसे लोकप्रिय चर्चों में से एक, लाल चर्च अपनी शानदार वेदी के लिए जाना जाता है जो कि मसीह के जीवन का विवरण देने वाले चित्रों को प्रदर्शित करता है।

गोधरा हाईवे पर प्रसिद्ध होल्कर पैलेस के पास स्थित, रेड चर्च को इस क्षेत्र में सबसे पुराना माना जाता है। चर्च की मण्डली ने 1930 के दशक में आसपास की लड़कियों के लिए सेंट राफेल स्कूल बनाने में भी मदद की।

मुख्य रूप से ब्रिटिश सैनिकों और उनके परिवारों, यूरोपीय व्यापारियों और मिशनरियों के लिए निर्मित, यह सुंदर गोथिक इमारत एक यात्रा के लायक है।

इसके अलावा इंदौर में व्हाइट चर्च भी स्थित है। इंदौर में रुचि के महत्वपूर्ण बिंदुओं में से एक के रूप में माना जाता है, व्हाइट चर्च आपको स्वायत्तता से पहले इंदौर में ब्रिटिश प्रभाव पर एक नज़र देता है।

इसकी संरचना यूरोपीय डिजाइन को दिखाती है, और क्रिसमस जैसे भविष्य के उत्सवों के बीच एक अविश्वसनीय दृश्य है। पूरा चर्च समाप्त हो गया है और जलाया गया है और यहाँ बहुत हवा संतोष और उत्सव के नारे लगाती है। यदि आप वैराग्य की तलाश में हैं, तो यह वह स्थान है जहाँ आपको जाना चाहिए।

243 साल पुराना क्राइस्ट चर्च,ग्वालियर: christ church , Gwalior
ग्वालियर ब्रिटिश आर्मी का गढ़ रहा हैं और उनके समय में कई चर्च और इमारतों का निर्माण भी करवाया गया। इसके अलावा सिंधिया शासकों ने कई निर्माणों में महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाई है। यहां एक चर्च करीब 243 साल पुराना है।

मुरार में बना क्राइस्ट चर्च ( Christ Church, gwalior ) 1775 में ब्रिटिश ऑफिसर द्वारा बनवाया गया था। इसकी पुष्टि 1844 के बंदोबस्त डॉक्यूमेंट से होती है। इस चर्च में कैंट एरिया में पदस्थ ब्रिटिश आर्मी के ऑफिसर प्रार्थना करने आते थे। इस चर्च की खासियत यह है कि इस चर्च ने 1857 का विद्रोह भी देखा है।

बताया जाता है कि उस दौरान यहां पास में रहने वाले ब्रिटिश अधिकारियों और उनके बच्चों की मौत भी हुई थी। चर्च में 1857 के विद्रोह में मरने वाले लोगों के नाम भी अंकित है।

सेंट फ्रांसिस असिसि कैथेड्रल चर्च, भोपाल:
करीब 150 वर्ष पुराने कैथोलिक ईसाई समुदाय के इस चर्च को पोप पॉल चतुर्थ द्वारा आर्च डायसिस ( Arch diasis ) का दर्जा प्रदान किया गया, वह मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल ( bhopalChurch ) में मौजूद है।

भोपाल शहर में कैथोलिक ईसाई समुदाय ( Catholic Christian Community ) का यह पहला चर्च है। 1875 में बना ये पुराना चर्च आज भी अपनी ऐतिहासिक गौरव गाथा को बयां करता है। जितना अद्भुत यह चर्च है, इसका इतिहास भी उतना ही अनूठा है। यह भोपाल के जहांगीराबाद में जिंसी चौराहे के पास स्थित है।

इस चर्च को शहर के सबसे पुराने चर्च का दर्जा प्राप्त है। 24 अक्टूबर 1875 को आगरा के विकार ऐपेस्टोलिक, डॉ. पॉल जोसी ओएफएम, फादर रफेल, फादर नोबर्ट, तत्कालीन बेगम और बोरबोन परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में चर्च का उद्घाटन हुआ था।

चर्च का निर्माण Church building : सिकंदर जहां बेगम ने दी थी जमीन...
कहते हैं कि इस चर्च को बनाने की अनुमति रियासत भोपाल की 8वीं शासिका सिकंदर जहां बेगम द्वारा दी गई थी। राजकुमारी इसाबेला ने 4 अक्टूबर 1873 को चर्च बनाने का काम शुरू करवाया था। इसके लिए उन्होंने जमीन दान में दी थी। पहले 10 बीघा जमीन में से 3 बीघा और उसके बाद 7 बिश्वा में से 1 बिश्वा हिस्सा दिया था।

MUST READ : करीब 150 वर्ष पुराना भोपाल का कैथेड्रल चर्च, जितना अद्भुत उतना ही अनूठा इतिहास


इस चर्च को शहर के सबसे पुराने चर्च का दर्जा प्राप्त है। 24 अक्टूबर 1875 को आगरा के विकार ऐपेस्टोलिक, डॉ. पॉल जोसी ओएफएम, फादर रफेल, फादर नोबर्ट, तत्कालीन बेगम और बोरबोन परिवार के सदस्यों की उपस्थिति में चर्च का उद्घाटन हुआ था।

सेंट राफेल चर्च, सागर: sagar church
सेंट राफेल चर्च ( St. Raphael's Church ) , जिसे अब सेंट थेरेसा कैथेड्रल ( St. Theresa's Cathedral ) के रूप में जाना जाता है, सागर (सौगोर) का सबसे पुराना कैथोलिक चर्च है। मिशनरी की उपस्थिति 1850 के दशक के अंत में शुरू हुई। सागर में पहला रिकॉर्डेड बपतिस्मा 1 जनवरी, 1863 को हुआ था। सेंट राफेल चर्च की नींव रेवफ्रा ने रखी थी।

राफेल मेची दा लिवोर्नो ओएफएम कैप, 13 दिसंबर, 1874 को। चर्च को आरटी द्वारा संरक्षित किया गया था।
सेंट राफेल चर्च सरल जीवन शैली के माध्यम से यीशु मसीह को देखने और इलाके के निचले जरूरतमंद लोगों की सेवा करने के लिए खड़ा है। 01 अक्टूबर, 2010 को डियोकेसन संरक्षक, बाल यीशु के सेंट थेरेसा के बाद कैथेड्रल का नाम बदल दिया गया था।

वैसे सेंट पीटर्स चर्च सागर का सबसे पुराना चर्च है। इसकी पहली आराधना 12 जनवरी 1841 में हुई थी।

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