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2 लाख से ज्यादा बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाकर देश में पहले स्थान पर मध्य प्रदेश

Ayushman Card : आयुष्मान भारत योजना के तहत देश में अबतक 70+ वालों के सबसे ज्यादा कार्ड बनाने में मध्य प्रदेश नंबर पर है। हालांकि प्रतिशत के अनुसार केरल पहले स्थान पर है।

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Ayushman Card : आयुष्मान योजना के तहत 70+ वालों के कार्ड बनाने में मध्यप्रदेश(Madhya Pradesh) देश में पहले स्थान पर है। अब तक प्रदेश में 2 लाख 667 के कार्ड बन चुके हैं। इससे इन बुजुर्गों को 5 लाख रुपए तक की स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिल सकेगा। बता दें कि प्रतिशत के अनुसार केरल पहले स्थान पर है।

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बुजुर्गों के डेटा में होगा सुधार

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आयुष्मान भारत योजना(Ayushman Bharat Yojana) मप्र के सीईओ डॉ. योगेश भरसट ने बुधवार को पत्रकार वार्ता में बताया कि मप्र में प्रतिदिन लगभग 30 से 35 हजार वरिष्ठ नागरिकों के कार्ड बनाए जा रहे हैं। लक्षित 34 लाख 73 हजार 325 कार्ड 15 जनवरी तक बनाने का लक्ष्य तय किया गया है।

वय वंदना कार्ड के लिए पंजीयन जरूरी

सीईओ डॉ. भरसट(Dr. Yogesh Bharsat) ने यह भी बताया कि पहले से पंजीकृत आयुष्मान(Ayushman Bharat Yojana) हितग्राहियों को वय वंदना कार्ड के लिए दोबारा पंजीकरण करना होगा। वय वंदना कार्ड प्राप्त करने पर वरिष्ठ नागरिकों को पांच लाख का अतिरिक्त टॉप- अप मिलेगा, जिससे कुल 10 लाख तक का स्वास्थ्य कवरेज मिल सकेगा। यह अतिरिक्त टॉप-अप केवल वृद्धजनों के लिए ही होगा, जबकि परिवार के अन्य सदस्यों को पूर्व निर्धारित पांच लाख का कवरेज मिलेगा।

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एड ऑन की अनुमति लें अस्पताल

डॉ. भरसट ने स्वीकारा कि कई मरीजों को अस्पताल के पूरे बिल का भुगतान नहीं हो पाता, क्योंकि आयुष्मान(Ayushman Bharat Yojana) के पैकेज में यदि संबंधित रोग के लिए पांच दिन भर्ती रहने की अनुमति है और अस्पताल ज्यादा दिन भर्ती रखते हैं तो उन्हें पांच दिन का ही भुगतान होता है। इसके लिए संबंधित अस्पताल को आयुष्मान कार्यालय से इलाज के लिए एड ऑन की अनुमति लेनी होगी।

उन्होंने कहा कि जो निजी अस्पताल गड़बड़ी करते पाए जाते हैं उनके खिलाफ चार प्रकार की सजा तय है। इसमें निलंबन, पेनल्टी, एफआइआर और योजना से संबद्धता खत्म करना शामिल है। अस्पतालों को पहले इलाज के 4-5 महीने बाद तक भुगतान होता था, अब ढाई माह में भुगतान किया जा रहा है।

भोपाल गैस पीडि़तों के आयुष्मान कार्ड(Ayushman Bharat Yojana) नहीं बनने पर कहा कि गैस राहत विभाग तय करता है कि गैस पीडि़त कौन हैं। विभाग से 30 हजार नाम आए हैं। 18 हजार के कार्ड बन चुके हैं।