पीढ़ी दर पीढ़ी चलती है एक ही प्रतिमा
महालक्ष्मी का विसर्जन नहीं किया जाता है, बल्कि एक ही प्रतिमा की परिवार में पीढ़ी दर पीढ़ी पूजा-अर्चना की जाती है। इसके लिए प्रतिमाओं के मुखौटे अलग से रहते हैं। जब स्थापना की जाती है, तो यह मुखौटे निकाले जाते हैं, और लोहे से बने पायली (ढाचा) पर कपड़े से बने हाथ, अथवा कपड़े से बना धड़ लगाते हैं। इसके बाद इस पर मुखौटा लगाते हैं, और उसे साड़ी पहनाई जाती है।