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Khel Ratna award: मेजर ध्यानचंद के नाम हुआ खेल रत्न अवार्ड, बेटे ने बोली भावुक करने वाली बात

Khel Ratna award: पत्रिका.कॉम से बातचीत में मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने बताया- भावुक क्षण...।

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भोपाल

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Manish Geete

Aug 06, 2021

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भोपाल। Khel Ratna award केंद्र सरकार ने देश के सबसे बड़े खेल रत्न पुरस्कार का नाम बदल दिया है। यह पुरस्कार मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार के नाम से जाना जाएगा। पहले यह पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के नाम पर था।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को ट्वीट के जरिए यह जानकारी देश को दी। झांसी में मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने पत्रिका से बातचीत में इसे खुशी का क्षण बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी के फैसले की तारीफ की है।

patrika.com पर पेश है मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद से बातचीत के अंश..।

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद के बेटे अशोक ध्यानचंद ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि यह बेहद खुशी का क्षण है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की खेलों के प्रति सोच उभरकर आई है। उन्होंने खेलों के महत्व को समझा है। उन्होंने खिलाड़ियों के संघर्ष को पहचाना है।

हॉकी की दोनों टीमों को श्रेय

अशोक ध्यानचंद ने कहा कि टोक्यो ओलंपिक में खेलकर इतिहास रचने वाली पुरुष और महिला हॉकी टीम को यह श्रेय जाता है। क्योंकि ओलंपिक में इन टीमों के प्रदर्शन के कारण ही आज हॉकी की इतनी चर्चा हो रही है। उन टीमों ने मेजर साहब को यह सम्मान दिलाया है। अशोक ध्यानचंद ने कहा कि मैं इस क्षण बेहद भावुक हैं, बार-बार खुशी के आंसू निकल रहे हैं। यह सम्मान हर देशवासियों को मिला है, मेरे घर और झांसी को मिला है।

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'भारत रत्न' के लिए बोली यह बात

मेजर ध्यानचंद को 'भारत रत्न' देने के सवाल पर अशोक ध्यानचंद ने कहा कि यह भावनाएं सारे देश की है, देश जानता है वे एक जमीनी इंसान थे। यदि ऐसा होता है, यह देश के हर व्यक्ति और घर का सम्मान होगा।

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मुख्यमंत्री बोले- ध्यानचंदजी को सच्ची आदरांजलि

हॉकी के जादूगर मेजर ध्यानचंद ने अपने अद्भुत खेल से न सिर्फ सारी दुनिया का दिल जीता, बल्कि अपने देश को भी एक अलग पहचान दिलाई। खेल रत्न पुरस्कार मेजर ध्यानचंद जी के नाम पर रखना उन्हें सच्ची आदरांजलि है। इस निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी का अभिनंदन करता हूं।

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कब हुई थी इसकी शुरुआत

खेल के क्षेत्र में सराहना और जागरूकता के लिए खेल रत्न पुरस्कार की शुरुआत 1991-92 में हुई थी। शतरंज ग्रैंड मास्टर विश्वनाथन आनंद इस पुरस्कार को पाने वाले पहले खिलाड़ी थे।

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कैसे तय होते हैं नाम

किसी भी वर्ष अप्रैल के अंत तक इसके लिए नामांकन स्वीकार किए जाते हैं। एक खेल के दो खिलाड़ियों से अधिक को नामित नहीं किया जाता है। 12 सदस्यीय समिति ओलपिक, पैरालिंपिक, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों के अंतरराष्ट्रीय आयोजन में से एक खिलाड़ी का मूल्यांकन करती है।समिति बाद में खेल एवं युवा मामलों के मंत्री केपास मंजूरी के लिए अपनी सिफारिश भेजती है।

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