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पुरुषों के कन्फेशन की कहानी को बयां करती है मीटू

राज्य संग्रहालय में शॉर्ट फिल्म की एजुकेशनल स्क्रीनिंग, कविता पाठ व संवाद कार्यक्रम

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पुरुषों के कन्फेशन की कहानी को बयां करती है मीटू

भोपाल। वनमाली सृजन पीठ और टैगोर कला केंद्र के सहयोग से अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की पूर्व संध्या पर गुरुवार को राज्य संग्रहालय सभागार में राजधानी के यंग राइटर- डायरेक्टर सुदीप सोहनी द्वारा बनाई गई शॉर्ट फिल्म प्तद्बह्लशश की एजुकेशनल स्क्रीनिंग और संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बतौर चीफ गेस्ट आईजी जयदीप प्रसाद और नूतन कॉलेज की प्रोफेसर डॉ. रेखा कस्तवार मौजूद रहे।

इस दौरान पल्लवी त्रिवेदी, अनुलता राजनायर, स्मिता राजन, हेमंत देवलेकर, विनय उपाध्याय ने कविता पाठ किया। सुदीप ने बताया कि राइटर विमल चंद्र पांडेय के फेसबुक पोस्ट प्तद्बह्लशश को देखकर यह फिल्म बनाने का आइडिया आया। फिल्म की शूटिंग के दौरान भी क्रू के कई मेंबर्स ने भी कन्फेशन किया जो फिल्म की सफलता को दर्शाता है।

एक्सपेरिमेंटल फिल्म में एक भी संवाद नहीं
फिल्म विशेष रूप से महिलाओं के विश्वयापी अभियान प्तद्वद्गह्लशश पर आधारित है, 10 मिनट की अवधि की यह एक एक्सपेरिमेंटल फिल्म है जिसमें कोई संवाद नहीं है लेकिन फिल्म में प्तद्वद्गह्लशश को लेकर छिड़ी विश्वव्यापी बहस और अभियान को एक संवेदनशील नजरिए से दिखाया गया। फिल्म को भोपाल में शूट किया गया, इसमें रंगकर्मी हेमंत देवलेकर, आरजे अनादि और राइटर पल्लवी सिंह ने एक्ट किया है।
पल्लवी द्वारा सुनाई गई रचना के चुनिंदा अंश
आपकी इज्जत आपके कर्मों में बसी
आपने दान किया.. आपकी इज्जत बढ़ी
जग जीता.. आपकी इज्जत बढ़ी
आविष्कार किए... आपकी इज्जत बढ़ी
फिर मेरी इज्जत आपने मेरी नाभि के नीचे क्यों बसाई?
मेरे जग जीतने से मेरी इज्जत नहीं बढ़ी
अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने से मुझे मान नहीं मिला
पर मेरे एक रात प्रेम करने से मेरी इज्जत खत्म हो गई, मुझ पर एक शैतान का हमला मेरी इज्जत लूट गया
मैं हैरत में हूं, मेरे एक जरूरी अंग को आपने कैसे मेरी इज्ज़त का निर्णायक बनाया? किसने आपको मेरी आबरू का ठेकेदार बनाया?
अगर बनाया तो बनाया, आप बुद्धिहीन नहीं, बहुत शातिर थे... मैं जान और समझ गई हूं आपके शातिराना खेल को
मुझे साजिशन गुलाम बनाया गया है
अब मैं अपनी इज्जत को अपनी जांघों के बीच से निकालकर फेंकती हूं
मेरा कौमार्य मेरी आजादी है.. न कि मेरी आबरू मेरा कौमार्य मेरी आज़ादी है.. न कि मेरी आबरू
मुझ पर एक हमला मुझे शर्मिन्दा नहीं करेगा अब ना ही मेरी इज़्ज़त छीन सकेगा मैं उठकर आपकी आंखों में डालकर आंखें हिसाब लूंगी अपने ऊपर हुए हमले का शर्मिन्दा होगा ये समाज और ये सरकार शर्मिंदा होंगे आप
मैं गर्विता हूँ और रहूंगी
हजार बार हुए हमलों के बावजूद