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माननीयों की मौज-ही मौज, एक लाख से ज्यादा सेलरी, 25 हजार पेंशन

चुनाव खत्म हो चुके हैं। भावी विधायकों को मतगणना का इंतजार है। चुनाव परिणाम आते ही प्रदेश में 230 माननीय एमएलए बन जाएंगे। मप्र में एक विधायक को प्रतिमाह एक लाख 10 हजार सेलरी और विभिन्न भत्तों के रूप में मिलते हैं।

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भोपाल. चुनाव खत्म हो चुके हैं। भावी विधायकों को मतगणना का इंतजार है। ३ दिसंबर को चुनाव परिणाम आते ही प्रदेश में २३० माननीय एमएलए बन जाएंगे। आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर विधायकों को सेलरी कितनी मिलती है जिसके लिए वह पिछले एक महीने से दिन रात एक किए हुए थे। तो जान लीजिए मप्र में एक विधायक को प्रतिमाह एक लाख १० हजार सेलरी और विभिन्न भत्तों के रूप में मिलते हैं। इसके अलावा आवास, ट्रेन और हवाई यात्रा में छूट के साथ ही वाहन, मकान आदि खरीदने में भी रियायत मिलती है। इसके अलावा कैबिनेट मंत्रियों को करीब १ लाख ७० हजार और राज्य मंत्रियों को एक लाख ५० हजार प्रति माह मिलता है। इन्हें कार और अन्य सुविधाएं अलग से मिलती हैं। मुख्यमंत्री को प्रतिमाह दो लाख मिलते हैं। इसके अलावा विधानसभा अध्यक्ष को 1 लाख 87 हजार रुपये मासिक वेतन मिलता है। इस तरह हर महीने यह खर्च करीब 2 करोड़ 14 लाख रुपए आता है। रिटायरमेंट के बाद कम से कम २५ हजार रुपए मासिक आजीवन पेंशन मिलती है।
समर्थक जोड़-घटाव में जुड़े
अभी चुनाव परिणाम नहीं आए हैं लेकिन संभावित माननीयों के समर्थकों ने विधायक को मिलने वाली सुविधाओं का जोड़-घटाव शुरू कर दिया है। किसी को मंत्री या विधायक को मिलने वाले बंगले में रहने की इच्छा है तो कोई उनका कार्यालय सहायक बनना चाहता है। इसकी सिफारिशें भी आनी शुरू हो गयी हैं।

विधायकों के वेतन-भत्ते
वेतन-३० हजार महीना
निर्वाचन क्षेत्र भत्ता- ३५ हजार
भत्ता-१० हजार
चिकित्सा भत्ता-१० हजार
कंप्यूटर आपरेटर भत्ता-१५ हजार
लेखन सामग्री, डाक भत्ता-१० हजार
कुल वेतन,भत्ता-१ लाख १० हजार रुपए महीनी

सेलरी और पक्र्स पर १५५ करोड़ खर्च
आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार प्रदेश के विधायकों और सेलरी पर पिछले छह सालों के दौरान कुल १५५ करोड़ रुपए खर्च हुए। खास बात यह है कि माननीयों के वेतन से अधिक खर्च विभिन्न भत्तों में किया गया। आरटीआई एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौड़ ने मप्र विधानसभा के अप्रेल 2018 से अगस्त 2023 के बीच विधायकों को वेतन और भत्ते पर हुए खर्च की जानकारी मांगी थी। पता चला कि वेतन पर तो केवल 39 करोड़ रुपए ही खर्च हुए। बाकी के ११६ करोड़ विधायकों ने छह सालों में यात्रा व्यय और, विभिन्न भत्तों और चिकित्सीय भत्ता पर खर्च कर दिया।

विधायकों को अलग-अलग भत्ते
भत्तों में 10.4 करोड़ रुपए यात्रा भत्ते के रूप में खर्च किए गए। चौकाने वाली बात यह है कि अप्रेल 2020 से मार्च 2021 के बीच लॉकडाउन और कोविड-19 अवधि के दौरान भी विधायकों के यात्रा भत्ते पर कुल लगभग 89.9 लाख रुपए खर्च हुए हैं।
विधायकों पर खर्च राशि
कब से कब तक- सेलरी-अलाउसेंस-टे्रवेलिंग अलाउंस-मेडिकल एक्सपेंसेस
अप्रेल २०१८ से मार्च २०१९-७३९६१२९३-१७४२७८१०७-१७४४९९९-३६४६९९५
अप्रेल २०१९ से मार्च २०२०-७१२००७४२-१८९९६७६४५-२३८३७९५३-१४०२००५
अप्रेल २०२० से मार्च २०२१-७०३९०६५२-१८३७४४२४७-८३९०७७५-६५७१९०४
अप्रेल २०२१से मार्च २०२२-७२०२१९१९-१८८११८४४९-२१३६२५२०-६७६६७०९
अप्रेल २०२२ से मार्च २०२३-७११०००००-१८९६६००००-१७२३६०९१-६४५७२१८
अप्रेल २०२३ से अगस्त २०२३-३५५३२५८२-९४७८३५४८-१५६१०८८९-६३६६७४६

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