
भोपाल। मध्य प्रदेश में 24 जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज में मदर मिल्क बैंक शुरू होंगे। अगले तीन से चार माह में 10 जिलों में ये सुविधा मिलने लगेगी। वहीं, 13 जिलों और 3 मेडिकल कॉलेज में अगले साल मार्च तक मिल्क बैंक बन जाएंगे। इससे उन मां को फायदा मिलेगा, जिन्हें किसी कारणवश दूध नहीं आता है। इससे वे नवजात को मां दूध नसीब हो सकेगा। इस बैंक में मशीनों के माध्यम से मां के दूध को छह महीने तक ताजा रखा जा सकेगा। इस मिल्क बैंक में माताएं अपना दूध भी दान कर सकेंगी।शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत से शुरुआत की गई थी। प्रदेश में पहला मदर मिल्क बैंक होशंगाबाद में करीब दस साल पहले शुरू हुआ। इसके बाद दूसरा मिल्क बैंक राजधानी के जेपी जिला अस्पताल में करीब 7 साल पहले शुरू किया गया था। वहीं, भोपाल एम्स में भी 2 मार्च को मिल्क बैंक शुरू किया गया है।
इस साल 10 जिलों में होंगे शुरू
मिल्क बैंक में पाश्चराइजेशन यूनिट, रफ्रिजरेटर, डीप फ्रीज, आरो प्लांट जैसे संसाधनों के जरिए छह महीने तक मां का दूध को सुरक्षित रहेगा। अगले तीन से चार माह में मुरैना, सतना, भिंड, रतलाम, गुना, उज्जैन, बड़वानी, मंदसौर, विदिशा, होशंगाबाद में मिल्क बैंक शुरू हो जाएंगे। वहीं, एनएचएम ने इस साल झाबुआ, श्योपुर, खंडवा, कटनी, नरसिंहपुर, सागर, दमोह, शाजापुर, छतरपुर, खरगोन और देवास में मिल्क बैंक खोलने का प्रस्ताव रखा है। वहीं, भोपाल, ग्वालियर, रीवा मेडिकल कॉलेज में भी एक-एक यूनिट खोली जाएगी।
हर बैंक के लिए 12 लाख का फंड
एनएचएम की डिप्टी डायरेक्टर डॉ. हिमानी यादव के अनुसरा मदर मिल्क बैंक ऐसे अस्पताल में खोला जा सकता है जहां हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए वहां के स्टाफ को प्रशिक्षण भी दिया जाता है। इसमें एक यूनिट में मशीन खरीद के लिए 9 लाख सहित कुल 12 लाख का बजट दिया जाता है।
Published on:
06 Apr 2023 09:23 pm
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