भोपाल

Mothers Day Special : ये अदृश्य मां है, चुपचाप करा जाती है अमृतपान

Mothers Day Special : शहर में 200 ऐसी मां हैं, जिनके बारे में उनके बच्चे नहीं जानते। न ही मां ये जानती है कि वो किस बच्चे की मां है। मदर मिल्क बैंक में 6 महीने तक मां का दूध फ्रेश रखा जाता है।

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Mothers Day Special : मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कम से कम 200 ऐसी मां हैं, जिनके बारे में उनके बच्चे जानते ही नहीं। वहीं, दूसरी तरफ वो मां भी नहीं जानतीं कि, वो किस बच्चे की मां हैं। लेकिन, वे एसएनसीयू में भर्ती नवजातों को दुग्धपान कराकर उन्हें अमृत दे जाती हैं। शहर के काटजू, जेपी और एम्स में हर दिन कुछ ऐसे बच्चों का जन्म होता है, जिनकी मां को विभिन्न कारणों से स्तनपान नहीं करा पातीं। कुछ ऐसे भी दुर्भाग्यशाली बच्चे जन्म लेते हैं, जिनकी मां का जन्म के समय ही देहांत हो जाता है। ऐसे बच्चों को मां का दूध मदर मिल्क बैंक के जरिए उपलब्ध करवाया जाता है।

फिलहाल, शहर में दो मिल्क बैंक हैं, एक एम्स और दूसरा काटजू में। प्रदेश का पहला ह्यूमन मिल्क बैंक जेपी अस्पताल में था, लेकिन इसे मार्च 2024 में काटजू अस्पताल में स्थानांतरित कर दिया गया। इन मदर मिल्क बैंकों का उद्देश्य उन नवजात शिशुओं को सुरक्षित मां का दूध उपलब्ध कराना है, जिनकी मां किसी कारण से स्तनपान करा पाने में असमर्थ हैं। दूसरा मदर मिल्क बैंक एम्स में है, जिसे 2 मार्च, 2023 को शुरू किया गया था।

कौन करता है दान?

एम्स के निदेशक डॉ. अजय सिंह के अनुसार, नवजात शिशुओं के लिए मां का दूध दो तरह की महिलाएं दान करती हैं। पहली स्वेच्छा से और दूसरी वे माताएं जो अपने बच्चों को दूध नहीं पिला सकती, जिनके बच्चे दूध नहीं पीते अगर उनका दूध नहीं निकाला जाए तो मां के रोगी होने की आशंका बढ़ जाती है।

मिल्क बैंक का उद्देश्य

मदर मिल्क बैंक उन बच्चों को मां का दूध उपलब्ध कराते हैं, जिनकी मां किसी कारण से दूध नहीं दे पा रही हैं या बच्चा कमजोर है या स्तनपान करने में असमर्थ है।

नहीं कर सकते व्यापार

ब्रेस्टफीडिंग प्रमोशन नेटवर्क ऑफ इंडिया शिशु दूध विकल्प के व्यापार से संबंधित कानून की निगरानी करता है। साथ ही यह मदर मिल्क बैंक को बिना लाभ-हानि के चलाने के लिए दूध दान के लिए प्रेरित करता है।

Published on:
11 May 2025 10:14 am
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