30 जनवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

मोगली के बूमरैंग को बचाएगी मध्यप्रदेश सरकार, ऑस्ट्रेलिया से आएगी विशेषज्ञों की टीम

मानव विज्ञान के जानकर कह रहे हैं कि मध्यप्रदेश में बूमरैंग का कोई इतिहास नहीं है

3 min read
Google source verification
9_2.jpg

,,

भोपाल/ जंगल बुक में मोगली का किरदार तो आप सभी को याद ही होगा। मोगली के साथ ही उसके हाथ में जो बूमरैंग था, उसकी भी खूब चर्चा होती थी। अब मध्यप्रदेश की सरकार मोगली के बुमेरांग की ब्रांडिंग करने की तैयारी में है। मध्यप्रदेश के आदिम जाति कल्याण मंत्री ओंकार सिंह मरकाम ने कहा है कि वह जंगल बुक में मोगली द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले बूमरैंग को लोकप्रिय बनाएंगे और इसके लिए ऑस्ट्रेलिया से विशेषज्ञों को आमंत्रित किया है।

जंगलबुक की पूरी कहानी मध्यप्रदेश के सिवनी के जंगलों की है। लेकिन समाजशास्त्रियों का कहना है कि मोगली का बूमरैंग कभी भी आदिवासी संस्कृति का हिस्सा नहीं रहा है। मगर मरकाम विश्वास रखते हैं तो अलग बात है। वहीं मंत्री मरकाम ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि हम आदिवासियों से जुड़े चीजों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। मोगली के हाथों में आपने ऐसा बूमरैंग देखा होगा। एक समय में मध्यप्रदेश में इसका प्रयोग होता होगा। हमने इसे बचाने का फैसला किया है।

अचानक से बूमरैंग को लेकर फैसला
वहीं, मंत्री मरकाम से जब पूछा गया कि आप बूमरैंग को लेकर अचानक ये फैसला ले रहे हैं। उस पर उन्होंने कहा कि हम आदिवासी संस्कृति को बचाने के लिए कई काम कर रहे हैं। बूमरैंग को बचाना भी उसी पहल का हिस्सा है। इसके लिए ऑस्ट्रेलिया से मदद ली जाएगी। मंत्री ने कहा कि हम ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञों से बात कर रहे हैं। वे इसे लेकर जल्द ही मध्यप्रदेश आएंगे।

प्रक्रिया में हैं सारी चीजें
मंत्री से जब पूछा गया कि इसे लेकर कोई तारीख निर्धारित की गई है क्या। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया में है। लॉन्च होने के बाद हम आपको बताएंगे। मंत्री ने कहा कि राज्य की सरकार जनजातीय ज्ञान और परंपरा को लोकप्रिय बनाने के लिए कोई योजनाओं पर काम कर रही है जो शहरी समाजों में भी उपयोगी हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि आदिवासियों की संस्कृति काफी समृद्ध है, जिसे बचाने की जरूरत है। हम इसके लिए काम कर रहे हैं।

एमपी में बूमरैंग का कोई इतिहास नहीं
हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में मानव विज्ञान विभाग के प्रमुख प्रोफेसर अवधेश शर्मा कहते हैं कि एमपी में बूमरैंग का कोई इतिहास नहीं है। यह आदिवासियों का एक शिकार करने का विशिष्ट उपकरण है। जिसका उपयोग ऑस्ट्रेलियाई आदिवासियों के द्वारा किया जाता है। उन्होंने कहा कि एमपी के बारे में तो भूल जाओ, बूमरैंग का पूरे भारत में कोई इतिहास नहीं है। प्रोफेसर शर्मा ने एक अंग्रेजी अखबार से बात करते हुए कहा कि मोगली निश्चित रूप से एक कल्पना है। उन्होंने कहा कि एक बार जंगल से रामू नाम के एक लड़के को बचाया गया था। कहा जाता है कि वह जंगली जानवरों के द्वारा पाला गया था। मोगली का कैरेक्टर भी कहीं न कहीं उसके करीब था, लेकिन मुझे नहीं पता कि रामू का बूमरैंग था।


उसी विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर राजेश गौतम ने कहा कि बूमरैंग का उपयोग मध्यप्रदेश में आदिवासी करते थे, इसका कोई सबूत नहीं है। ऑस्ट्रेलिया में लोग इसका पहले बहुत करते थे, लेकिन उनलोगों ने भी बंद कर दिया है।

Story Loader