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केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा – प्रदेश में 64 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी भवन विहीन

साढ़े सात हजार में नहीं है शौचालय, 1200 में पीने का पानी नहीं  

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भोपाल

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Arun Tiwari

Dec 18, 2019

केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा - प्रदेश में 64 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी भवन विहीन

केंद्र सरकार की रिपोर्ट में खुलासा - प्रदेश में 64 हजार से ज्यादा आंगनबाड़ी भवन विहीन

भोपाल : बच्चों और महिलाओं के पोषण आहर का आधार बनीं प्रदेश की आंगनबाडिय़ां भवन विहीन हैं। प्रदेश में कुल 97 हजार 135 आंगनबाड़ी संचालित हैं जिनमें से सिर्फ 32789 के पास ही खुद का भवन है। यानी प्रदेश में 64 हजार 456 आंगनबाड़ी भवन विहीन हैं। ये या तो किराए के मकानों में संचालित हैं या फिर टूटे-फूटे सार्वजनिक स्थानों पर अपना काम चला रही हैं। केंद्र सरकार की इस रिपोर्ट से पोषण आहर वितरण की व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। वहीं 7632 आंगनबाडिय़ों में शौचालय तक नहीं है। 1200 आंगनबाड़ी में पानी का पानी नहीं है।

इन आंगनबाडिय़ों के निर्माण के लिए केंद्र सरकार से प्रदेश को 1200 करोड़ से ज्यादा फंड चाहिए। लेकिन केंद्र सरकार ने पिछले तीन सालों में प्रदेश को 100 करोड़ रुपए भी नहीं दिए। प्रदेश सरकार के पास वैसे भी फंड की कमी है, लेकिन पोषण व्यवस्था बेहतर करने के लिए सरकार अपनी ओर से भवन निर्माण के लिए फंड जुटाने के रास्ते तलाश रही है।

इस तरह होती है आंगनबाड़ी भवन बनाने की व्यवस्था :

सरकारी आंकड़ों के हिसाब से एक आंगनबाड़ी भवन बनाने पर करीब 7 लाख रुपए खर्च होते हैं। केंद्र सरकार मनरेगा की राशि के तहत इन भवन निर्माण की व्यवस्था करती है। पांच लाख रुपए मनरेगा से मिलते हैं जबकि बाकी दो लाख रुपए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग अपने बजट से देता है। इसी तरह जर्जर भवन की मरम्मत के लिए भी केंद्र सरकार दो लाख रुपए प्रति आंगनबाड़ी के हिसाब से आवंटित करती है। इस तरह प्रति आंगनबाड़ी दो लाख रुपए के हिसाब से केंद्र सरकार प्रदेश को 1200 करोड़ से ज्यादा फंड उपलब्ध कराएगी।

पिछले दो साल में प्रदेश को आवंटित राशि :

64 हजार से ज्यादा आंगनबाडिय़ा भवन विहीन होने के बाद भी केंद्र सरकार से पिछले तीन साल में प्रदेश को पर्याप्त फंड नहीं मिला है। साल 2015-16 में प्रदेश को इस मद से कोई पैसा नहीं दिया गया। साल 2016-17 में भी प्रदेश की हाथ खाली रहे। जबकि 2017-18 में केंद्र सरकार ने प्रदेश को आंगनबाड़ी भवन बनाने के लिए 96 करोड़ रुपए दिए। इस तरह तीन साल में प्रदेश को केंद्र की तरफ से 100 करोड़ रुपए भी नहीं मिल पाए। जबकि 2015-16 में पांच हजार भवनों की मरम्मत के लिए छह करोड़ रुपए और साल 2016-17 में 7 हजार भवनों में सुधार के लिए 8 करोड़ 40 लाख रुपए आवंटित किए गए। भाजपा सांसद ढालसिंह बिसेन ने भी ये मामला संसद मेें सवाल के जरिए उठाया था।

निजी संस्थाओं से मांगा सहयोग :

सरकार ने सामाजिक संस्थाओं, औद्योगिक घरानों और स्वैच्छिक दानदाताओं से अपील की है कि वे बच्चों के बच्चों के पोषण के लिए सरकार को आर्थिक सहयोग करें ताकि उस फंड से आंगनबाडिय़ों के लिए भवन का निर्माण हो सके। सरकार ने विधायक-सांसदों से भी आह्वान किया है वे अपनी निधि से इस सामाजिक कल्याण के काम में सहयोग कर सकते हैं। सरकार सभी आंगनबाडिय़ों में बिजली की व्यवस्था भी करने जा रही है।

- केंद्र सरकार प्रदेश के हिस्से का फंड नहीं दे रही जिससे आंगनबाड़ी भवन विहीन हैं। हम अब अपने फंड से इन भवनों का निर्माण करेंगे ताकि बच्चों के पोषण की व्यवस्था में कोई कमी न रहे। हमने सामाजिक संगठनों और विधायक-सांसदों से भी आर्थिक सहयोग की अपील की है। - इमरती देवी मंत्री,महिला एवं बाल विकास -