
शहरी गरीबों को पक्के आवास देने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत करीब 7 लाख लोगों को राशि जारी की, लेकिन इसमें 15 हजार से ज्यादा लोगों ने पहली किस्त लेकर मकान का काम ही शुरू नहीं किया। करीब 3 हजार लोग ऐसे हैं, जो पते से गायब है। अब इन्हें तलाशना निकायों के लिए भी मुश्किल साबित हो रहा है। इधर, नगरीय प्रशासन विभाग ने निकायों को आदेश जारी कर ऐसे लोगों से वसूली के आदेश दिए हैं। आदेश के बाद इन हितग्राहियों से करीब 150 करोड़ रुपए वसूल करना मुश्किल साबित हो रहा है।
निकायों के अनुदान से काटी जाएगी राशि
चुनाव खत्म होते हुए नगरीय प्रशासन विभाग ने ऐसी हितग्राहियों के खिलाफ सख्ती दिखाने का मन बनाया लिया है। यदि ये लोग 10 दिसंबर तक आवास निर्माण शुरू नहीं करेंगे तो इन्हें राशि लौटानी होगी। साथ ही निकायों को भी आदेश जारी किया गया है कि यदि वसूली नहीं हो पाई तो इस राशि की वसूली निकायों को मिलने वाले अनुदान से ही काटी जाएगी। अपर आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास कैलाश वानखेड़े का कहना है कि जिन हितग्राहियों ने आवास निर्माण के लिए राशि लेने के बाद भी निर्माण शुरू नहीं किया गया है। उनसे राशि की वसूली की जाएगी। 10 दिसंबर तक उन्हें आवास निर्माण प्रारंभ कर इसकी जानकारी निकाय को देना होगी। दमोह में 700, टीकमगढ़ में 600, बुरहानपुर में 550, छिंदवाड़ा में 450, ग्वालियर में 325, धरमपुरी में 300, सागर में 200 और जबलपुर में 200 हितग्राहियों ने राशि लेकर निर्माण शुरू नहीं किया।
17 हजार करोड़ का दिया अनुदान
सरकार ने प्रदेश के 407 नगरीय निकायों में करीब 7 लाख शहरी गरीबों को आवास बनाने के लिए 17 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा का अनुदान दिया। आवास निर्माण पर एक हितग्राही को 2.50 लाख रुपए की राशि दी जाती है। 15 हजार हितग्राही ऐसे हैं, जिन्हें एक लाख रुपए की राशि जारी की गई। लेकिन पिछले पांच साल में इन्हें मकान का निर्माण शुरू ही नहीं किया। ज्यादातर ने तो नींव खुदाई तक का काम नहीं किया। अधिकारियों का कहना है कि इनमें से कुछ मामले ऐसे हैं जिसमें हितग्राही की मौत हो गई। ऐसे प्रकरणों में उत्तराधिकारी से वसूली की जाएगी।
Published on:
25 Nov 2023 02:00 am
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