
मध्यप्रदेश विधानसभा चुनावों में भाजपा ने लाडली लहर पर सवार होकर प्रचंड जीत दर्ज की है। भाजपा रुझानों के साथ 167 सीटों पर आगे चल रही है, जबकि कांग्रेस महज 62 सीटों पर आगे चल रही है। कांग्रेस को उन इलाकों में भारी हार का सामना करना पड़ा है, जहां पर उसे सबसे मजबूत माना जा रहा था। ग्वालियर—चंबल से लेकर महाकौशल तक कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। कई जिलों में कांग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई है।
भाजपा की जीत की यह वजहें
लाड़ली बहना योजना : चुनाव से ठीक पहले मध्यप्रदेश में भाजपा ने लाडली बहना योजना शुरू की और उसके बाद पूरा चुनाव उसी पर फोकस कर दिया। वोट शेयर में महिलाओं का वोट करीब दो फीसदी बढ़ा। भाजपा ने शुरू से ही दावा किया कि यह दो फीसदी वोट भाजपा के हिस्से में जाएगा और चुनाव परिणामों में अब उसका असर माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि लाडली बहना के सहारे ही भाजपा ने बड़ी जीत दर्ज की है।
शिवराज पर भरोसा : भाजपा ने शुरुआत में चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पीछे किया, लेकिन जब माहौल बनता दिखाई नहीं दिया तो वापस शिवराज सिंह को काम पर लगाया। खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर दूसरे नेताओं ने मंच से लाडली बहना योजना की तारीफ की। उसके बाद शिवराज सिंह चौहान ने सभाएं की और 160 विधानसभाओं में रैलियों को संबोधित किया और माहौल अपने पक्ष में कर लिया।
डबल इंजन की सरकार: भाजपा अपने डबल इंजन की सरकार के भरोसे को बरकरार रखने में सफल रही। दिल्ली में प्रधानमंत्री मोदी और मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान पर भरोसा दिखाया गया। प्रधानमंत्री का गारंटी वाला बयान भी मध्यप्रदेश में महत्वपूर्ण रहा।
कांग्रेस की हार का यह कारण
समन्वय की कमी: कांग्रेस में पूरा चुनाव अकेले कमलनाथ ने लड़ा। उन्होंने सामूहिक नेतृत्व को स्वीकार नहीं किया और दूसरे नेताओं को इसमें शामिल नहीं किया। उनके निर्णयों में कई बार विरोधाभास भी दिखाई दिया। जिसका असर चुनाव परिणामों में दिखाई दिया। कई इलाकों में बड़े नेताओं ने काम भी नहीं किया।
15 महीने की छाप: कमलनाथ सरकार के 15 महीने का भ्रष्टाचार और दूसरी वजहें भी उनका जनता पर भरोसा नहीं बना सका। उलट इसके भाजपा ने उन पर जमकर प्रहार किए। कांग्रेस अपनी रैलियों में अपनी बात को दमदारी से नहीं उठा पाई।
भरोसा नहीं दिखा पाए : कांग्रेस ने अपनी योजनाओं का भरोसा पब्लिक पर नहीं दिखा पाया। जिसके कारण उनकी योजनाओं पर जनता ने भरोसा नहीं किया और उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा। दिग्विजय सिंह और दूसरे नेताओं ने पूरी दमदारी से संग नहीं दिया। इसी कारण कांग्रेस कई दिग्गज नेताओं को हार का सामना करना पड़ा।
अति आत्मविश्वास : कांग्रेस मानकर ही चल रही थी कि वह जीत रही है। ऐसे में उसके अति आत्मविश्वास के कारण उसने चुनाव लड़ने में पूरी ताकत नहीं लगाई। यही वजह रही कि कांग्रेस के कई स्टार प्रचारक चुनाव प्रचार करने के लिए भी नहीं निकले। दूसरे राज्यों के बड़े कांग्रेस नेता भी मध्यप्रदेश नहीं आए।
Updated on:
03 Dec 2023 05:26 pm
Published on:
03 Dec 2023 05:24 pm
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