
भोपाल। आपको जानकर हैरानी हो रही होगी न कि सीएम को कौन हथकड़ी पहनाकर सरेबाजार घुमा सकता है। पर ऐसी शर्मनाक घटना को अंजाम दिया गया था ब्रिटिश शासन काल में। सन् 1956 में पहली बार मध्यप्रदेश में पहली बार सीएम चुने गए थे। 2 अगस्त को जन्में पंडित रविशंकर शुक्ल को एमपी के पहले सीएम बनने का गौरव प्राप्त है।
जानें पहले सीएम को क्यों सहना पड़ा था अपमान
* सन् 1946 वो समय था तब देश आजाद नहीं हुआ था।
* जब एक समाज के लोगों ने पूरे देश में आंदोलन का बिगुल बजा दिया था।
* इस आंदोलन के लीडर थे भूपेंद्र नाथ मुखर्जी। मुखर्जी नागपुर में पं रविशंकर शुक्ल से मिलने गए।
* तब वे चाहते थे कि अंग्रेजों को किसी भी हाल में यह बात पता न चल पाए कि वे पं. शुक्ल से मिलने पहुंचे हैं।
* इस मुलाकात के दौरान भूपेंद्र नाथ ने पं. शुक्ल से कहा,'आप हमारी मांगें सरकार से पूरी करवा दीजिए।'
* पंडित शुक्ल जी उनकी इस बात को मान गए।
* लेकिन कुछ ही देर में पंडित जी के घर पर अंग्रेज पहुंच गए और भूपेंद्र नाथ को गिरफ्तार कर लिया।
ध्यान से पढ़ें ये रोचक किस्सा
सन् 1918 की बात है, जब पं. रविशंकर शुक्ल और बामनराव लाखे ने रायपुर में कांग्रेस का एक सम्मेलन रखा। इस सम्मेलन में टिकट के बिना एंट्री ही नहीं थी। लेकिन कुछ अंग्रेज पुलिस के लोग बिना टिकट लिए पंडाल में पहुंचने लगे।
पंडित जी ने किया विरोध
अंग्रेजों के बिना टिकट प्रवेश को पर पंडित जी ने ऐतराज जताया। उन्होंने अंग्रेजों से कहा 'हमारे आदमी भी टिकट लेकर ही एंट्री कर रहे हैं, तब आप कैसे बिना टिकट के अंदर आ सकते हैं।' यह कहकर पंडित जी और बामनराव लाखे ने एक-दूसरे का हाथ पकड़कर अंग्रेज पुलिस का रास्ता रोक लिया, ताकि वे बिना टिकट लिए अंदर प्रवेश न कर सकें।
विरोध से बौखला गए अंग्रेज
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अंग्रेज पुलिस बौखला गई। इसका बदला लेने के लिए पुलिस ने पंडित जी और बामनराव को हथकड़ी पहना कर पूरे शहर में घुमाया था।
Published on:
03 Aug 2017 11:32 am

बड़ी खबरें
View Allट्रेंडिंग
