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मूक बधिर के लिए ‘बजरंगी भाईजान’ साबित हुई मध्य प्रदेश पुलिस

22 साल पहले गलती से पहुंची थी पाकिस्तान

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भोपाल. मूक बधिर बच्ची को अपने मां बाप तक पहुंचने में मददगार साबित हुआ उसके शरीर पर मौजूद एक पैदाइशी निशान। 22 साल पहले अपने परिवार से बिछड़ पाकिस्तान पहुंची गीता को आखिरकार भारत लौटने के 5 साल बाद अपने परिवार से मिलने का मौका मिला। गीता का असली नाम राधा वाघमारे है। उसे उसकी असली मां महाराष्ट्र के नैगांव में मिली।

महज 8 साल की उम्र में महाराष्ट्र के परमणी जिले की रहने वाली राधा गलती से अपने मां बाप से बिछड़ कर समझौता एक्सप्रेस में बैठकर पाकिस्तान के कराची पहुंच गई। तब से लेकर आज तक हर रोज वह अपने परिवार की राह निहारा करती थी। 2015 में भारत लौटी राधा ने पाकिस्तान में बिताए गए 15 वर्षों के बारे में इसारों में बताते हुए कहा कि, वो दिन मेरे जीवन का ऐसा समय रहा जब हर रोज सुबह उठने के बाद मन में एक ही ख्याल आता था कि वह पल कब आएगा जब मैं अपने देश की धरती पर दोबारा लौट सकूंगी। कब मैं अपने मां के आंचल में सुकून की नींद ले सकूंगी।

हालांकि भारत लौटने के बाद भी राधा को अपने मां-बाप से मिल पाने में लगभग 5 वर्ष से अधिक का समय लग गया। भारत लौटने के बाद राधा इंदौर की आनंद सर्विस सोसायटी जो कि एक मूक-बधिर दिव्यांग बच्चों की संस्था है, की मदद से अपने मां-बाप तक पहुंचने में कामयाब हो सकी।

मध्य प्रदेश पुलिस के द्वारा राधा को आनंद सोसाइटी के सहयोग से स्थापित मध्य प्रदेश मूकबधिर पुलिस सहायता केंद्र के माध्यम से सहायता प्राप्त हुई । जिसकी मदद से मध्य प्रदेश जीआरपी एवं इंदौर पुलिस की सहायता से उन्हें अपने परिवार जनों से मिलने में सफलता मिली। अपने मां बाप से मिलने के बाद राधा ने मध्य प्रदेश पुलिस, जीआरपी, सहित तत्कालीन विदेश मंत्री स्वर्गीय सुषमा स्वराज को भी धन्यवाद कहा जिनकी मदद से राधा सही सलामत भारत वापस लौट सकी थी।

मां के चेहरे की मुस्कान वापस आई
बेटी से मिलने के बाद मां मीना पांढरे की खुशीयों का ठिकाना नहीं रहा। उन्होंने कहा कि बेटी के गुम हो जाने के बाद उन्होंने उसे खोजने का हर संभव प्रयास किया‌। भारत सरकार और मध्य प्रदेश जीआरपी की मदद से उन्हें उनकी बेटी तक पहुंचने में सफलता हासिल हुई, जिसके लिए उन्होंने सभी का आभार प्रकट किया।

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