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MP News : तहसीलदार और नायब तहसीलदार 3 दिन के सामूहिक अवकाश पर गए, इस कारण है नाराजगी

- तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने जिला प्रशासन का सरकारी वॉट्सएप से ग्रुप भी छोड़ देने के अलावा अपना सरकारी वाहन भी खड़ा कर दिया है।

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भोपाल। मप्र के समस्त राजस्व अधिकारी जिनमें तहसीलदार व नायब तहसीलदार शामिल हैं, सोमवार से बुधवार तक सामुहिक अवकाश पर चले गए हैं। दरअसल इस सामुहिक अवकाश का कारण प्रमोशन, नायब तहसीलदारों को राजपत्रित घोषित करने और राजस्व अधिकारियों की ग्रेड-पे वेतन विसंगतियों की मांगें हैं।

जो अब तक पूरी नहीं की गई हैं, ऐसे में सरकार से नाराज ये तहसीलदार और नायब तहसीलदार सोमवार से सामूहिक अवकाश पर चले गए हैं। यहीं नहीं प्रदेश के तहसीलदारों और नायब तहसीलदारों ने जिला प्रशासन का सरकारी वॉट्सएप से ग्रुप भी छोड़ देने के अलावा अपना सरकारी वाहन भी खड़ा कर दिया है। बताया जाता है कि इस अवकाश को फैसला मप्र राजस्व अधिकारी (का.प्रशा.सेवा) संघ की बैठक में लिया गया।

वहीं मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी संघ के अनुसार वर्ष 1999 से 2008 के बीच एमपी पीएससी के द्वारा नायब तहसीलदारों की भर्ती की गई थी, लेकिन उन्हें प्रमोशन नहीं मिला। यदि नियम के अनुसार प्रमोशन होता तो उनकी अब तक दो बार पदोन्नति हो जाती। यानि वे अब तक जॉइंट कलेक्टर बन जाते, लेकिन पदोन्नति रुकने के चलते डिप्टी कलेक्टर तक बन नहीं सके है। अभी 220 तहसीलदार पदोन्नति का रास्ता देख रहे हैं। इनमें अनेक ऐसे भी हैं, जिन पर विभागीय जांच लंबित है।

तहसील कार्यालयों में तहसीलदार व नायब तहसीलदार की अनुपस्थिति के चलते जनता से जुड़े कई कार्य प्रभावित होने शुरु हो गए हैं। वहीं सोमवार को राजस्व अधिकारी संघ के बैनर तले भोपाल में सीनियर अधिकारियों ने संगठन के पदाधिकारियों के साथ बैठक की। सामने आ रही सूचना के अनुसार राजस्व विभाग के प्रमुख सचिव से भी संघ की सोमवार को लगातार चर्चा चल रही है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हो सका है।

जानकारों की मानें तो इन अधिकारियों के अवकाश पर जाने से बंटाकन और सीमांकन जैसे कई काम नहीं हो पाएंगे। ऐसे में पेंडिंग केस के नंबरों में इजाफा देखने को मिलेगा। इसके अतिरिक्त लाड़ली बहना योजना की मानीटरिंग भी इसके चलते प्रभावित होगी। ज्ञात हो कि अभी की व्यवस्था में अधिकांश जरूरी कार्य तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर से ही आगे बढ़ाए जाते हैं इसका अर्थ ये है कि अफसर व्यवस्था का यह महत्वपूर्ण अंग हैं। ऐसे में यदि यही स्थिति रही कई सरकारी काम प्रभावित होंगे ही साथ ही आम लोगों को भी परेशानी का सामना करना होगा।

ज्ञात हो कि फरवरी से ही मप्र में तहसीलदारों को डिप्टी कलेक्टर (कार्यवाहक) और नायब तहसीलदारों को तहसीलदार बनाने का गर्माया हुआ है। इनकी ख्वाइश है कि ये आदेश सामान्य प्रशासन विभाग के द्वारा निकाले जाएं, जिसे उसी तहसील पर इन्हें पदोन्नति मिले। आपको बताते चलें कि अब तक लिस्ट जारी नहीं होने से नाराज होकर ही ये सामूहिक अवकाश पर गए हैं।

मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी संघ के पदाधिकारियों के अनुसार लंबे समय से मांग करने के बावजूद अब तक उनकी मांगे पूरी नहीं की गई है। इसी नाराजगी के चलते गुरुवार (16 मार्च) और शुक्रवार (17 मार्च) को उन्होंने काली पट्टी बांधकर काम किया, जबकि शनिवार-रविवार को सरकारी छुट्टी होने से काम नहीं किया। ऐसे में इसके बाद अब तीन दिन का अवकाश ले लिया है।

इस पूरे मामले में खास बात ये भी है कि मध्यप्रदेश राजस्व अधिकारी संघ के पदाधिकारियों की मांग है कि यदि कार्यवाहक डिप्टी कलेक्टर या तहसीलदार का प्रभार दिया भी जा रहा है, तो आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ही जारी करें, न कि रेवेन्यू विभाग। तभी वे प्रभार लेंगे। पूर्व में भी राजस्व निरीक्षकों को कार्यवाहक नायब तहसीलदार बनाया गया था। जिनसे बाद में यह प्रभार ले लिया गया। क्योंकि यदि सामान्य प्रशासन विभाग आदेश निकालता है, तो सीधे भोपाल स्तर से ही यह प्रक्रिया की जाएगी।