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मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रम से हटेंगी मुगलों की गाथाएं, शामिल होगा भारत का गौरवशाली इतिहास

सीबीएसई बोर्ड की तरह एमपी बोर्ड में भी मुगलों की गाथाओं को सिलेबस से हटाने की तैयारी । नए पाठ्यक्रम में मुगल साम्राज्य और मुगलों को अब शामिल नहीं किया जाएगा।

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भोपाल. मध्य प्रदेश के शिक्षा पाठ्यक्रमों में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिलने वाला है। मध्य प्रदेश के स्कूली पाठ्यक्रमों से अब मुगल शासकों से संबंधित पाठ्यक्रमों को हटाया जाएगा। सीबीएसई बोर्ड की तरह एमपी बोर्ड में भी मुगलों की गाथाओं को सिलेबस से हटाने की तैयारी हो रही है। नए पाठ्यक्रम में मुगल साम्राज्य और मुगलों को अब शामिल नहीं किया जाएगा।

मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने कहा कि मुगल साम्राज्य और मुगलों की गाथाओं को सिलेबस में शामिल नहीं किया जाएगा। सिलेबस से टीपू सुल्तान,सिराजुद्दौला, अकबर सहित तमाम मुगल शासकों की गाथाओं को स्कूल पाठ्यक्रम से हटाया जाएगा।

भारत के गौरवशाली इतिहास और गौरवशाली परंपराओं को सिलेबस में शामिल किया जाएगा, जिससे छात्र छात्राएं भारत के गौरवशाली इतिहास और परंपराओं के बारे में जान सके। उन्होंने कहा कि भारत में मुगल शासकों के शासन करने को गलत तरीके से पेश किया गया है। अब भारत के गौरवशाली इतिहास और परंपरा को ही छात्र-छात्राओं को पढ़ाया जाएगा।

सिलेबस ऐसा हो जो 21वीं सदी के चैलेंजों को करे स्वीकार

इस संदर्भ में मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों के प्रिंसिपलों का कहना है कि सिलेबस 21वीं सदी के चैलेंज को स्वीकार करने वाला होना चाहिए। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए कि विश्व में शांति का संदेश दे। बच्चे आपस में सद्भाव रखें और यह जान सके कि किस तरह की अनियमितताओं से सामाजिक संतुलन बिगड़ सकता है।
बच्चों की शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो भारत की गरिमा को प्रदर्शित कर सके, बच्चे भारत की संस्कृति के बारे में बेहतर तरीके से जान सके, भारत देश को आगे ले जाने की दिशा में कदम बढ़ा सकें। जिन्होंने भी समाज की संस्कृति और सद्भावना बनाए रखने के लिए प्रयास किया है उन सभी की गाथाओं को सिलेबस में शामिल किया जाना चाहिए।

कांग्रेस ने जताई तीखी प्रतिक्रिया

वहीं सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस एक बार फिर से अपनी कड़ी प्रतिक्रिया जताने लगी है। कांग्रेस का कहना है कि भाजपा की मंशा दो धर्मों के बीच भेदभाव पैदा करना है। हम इस बात को नकार नहीं सकते कि अंग्रेजो ने हमारे देश पर 300 साल शासन किया और उसके बाद मुगलों ने भारत पर आक्रमण किया और वह यहीं के होकर रह गए। निसंदेह हमारा इतिहास बहुत गौरवशाली है लेकिन सरकार के इस फैसले को उन्नति और प्रगति के रास्ते में बड़ा कदम नहीं माना जा सकता।