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गजब के क्रिकेटर, बॉल की खनक पर ही उड़ा देते हैं चौके-छक्के

ये गजब के क्रिकेटर हैं। ये बॉल को देखकर नहीं; बल्कि उसकी आवाज सुनकर ही चौके-छक्के उड़ा देते हैं। आती हुई बॉल की खनक से चौके-छक्के लगाते हैं। आइसीसी वर्ल्ड कप के महामुकाबले के बीच राजधानी के ओल्ड कैम्पियन स्कूल ग्राउंड पर ये अनोखे क्रिकेट मैच चल रहे हैं।

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गजब के क्रिकेटर

ये गजब के क्रिकेटर हैं। ये बॉल को देखकर नहीं; बल्कि उसकी आवाज सुनकर ही चौके-छक्के उड़ा देते हैं। आती हुई बॉल की खनक से चौके-छक्के लगाते हैं। आइसीसी वर्ल्ड कप के महामुकाबले के बीच राजधानी के ओल्ड कैम्पियन स्कूल ग्राउंड पर ये अनोखे क्रिकेट मैच चल रहे हैं।

यहां ऐसे प्लेयर्स आए हैं जोकि अलग अंदाज में क्रिकेट खेलते हैं। इस अनूठे आयोजन का गजब का रोमांच है। यहां दरअसल नेशनल ब्लाइंड क्रिकेट टूर्नामेंट खेला जा रहा है। इस 4 दिवसीय टूर्नामेंट में 6 राज्यों की टीमें भाग ले रहीं हैं।

इंडियन ब्लाइंड क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान मानवेंद्र सिंह पटवाल ने बताया कि ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन के एमपी चैप्टर के गठन के बाद प्रदेश में यह अपनी तरह का पहला आयोजन है। मैच में मध्यप्रदेश की टीम गोवा को हराकर विजेता बनी। गोवा एवं मध्यप्रदेश की टीम के बीच दूसरा मैच खेला गया था। गोवा ने 20 ओवर में 135 रन बनाए। मध्यप्रदेश को जीत के लिए 136 रनों की जरूरत थी, जिसे टीम ने 3 विकेट खोकर हासिल किया।

भोपाल के ओल्ड कैम्पियन स्कूल ग्राउंड पर पहले भी क्रिकेट मैच हो चुके हैं लेकिन इस मैच के खिलाड़ी विशिष्ट हैं। चौके-छक्के यहां भी लग रहे हैं लेकिन अंदाज जुदा है। बॉलर दौड़ते हुए अंडर आर्म बॉल फेंकता है। छर्रे से भरी बॉल छन-छन करती आवाज के साथ बल्लेबाज तक पहुंचती है। बैट्समैन आवाज पर फोकस करते हुए बॉल को हिट करता है। फील्डर भी आवाज को सुनते हुए बॉल पकड़ने दौड़ता है।

नेशनल ब्लाइंड क्रिकेट टूनार्मेट में 6 राज्यों-मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, गोवा, पंजाब और ओडिशा की टीमें भाग ले रही हैं। प्रतियोगिता का आयोजन मप्र ब्लाइंड क्रिकेट एसोसिएशन ने किया है। एसोसिएशन के संयोजक और प्रवक्ता डॉ. राजीव जैन का कहना है कि यहां आए कई खिलाड़ी ऐसे हैं, जो राष्ट्रीय किकेट टीम का हिस्सा रहे हैं।

सामान्य से थोड़ा अलग नियम
तीन कैटेगरी के ब्लाइंड बी-1, बी-2, बी-3 होते हैं। 11 खिलाड़ी खेलते हैं तो 4 खिलाड़ी बी-1 कैटेगरी के होते हैं, जिनकी आंखों की रोशनी पूरी तरह जा चुकी होती है। बी-2 कैटेगरी के खिलाड़ी 2 बाय 60 तक देखते हैं, यानी एक आम इंसान जैसे 60 मीटर तक क्लियर देखता है, वो केवल दो मीटर तक देख सकते हैं। तीसरी कैटेगरी बी-3 होती है। ये खिलाड़ी 3 से 6 मीटर तक देख सकते हैं।

मैच में हाइ फाइबर की बॉल में छर्रे डले होते हैं ताकि वो आवाज करे। क्रिकेट में अंडर आर्म बॉलिंग होती है। यानी बॉल लुढ़कते हुए जाती है। अन्य रूल्स आम क्रिकेट की तरह होते हैं।

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