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बिग बी के सेक्रेटरी ने कटवाया था नवीनचंद्र भूता का टिकट

राजनीति में कभी-कभी अप्रत्याशित हादसे हो जाते हैं। बात वर्ष 1985 की है। भिंड विधानसभा सीट पर तत्कालीन विधायक नवीनचंद्र हरि किशनदास जाधव भूता का टिकट पक्का था, लेकिन कांग्रेस हाईकमान ने ऐनवक्त पर काट दिया। नहीं मिला दोबारा विधायक बनने का मौका....अचानक हुए घटनाक्रम ने सभी को चौंका दिया। ये टिकट फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन (बिग बी) के प्राइवेट सेक्रेटरी के आग्रह पर काटा गया था। बिग बी ने अपने मित्र तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी से बात कर उदयभान सिंह कुशवाह को टिकट देने की सिफारिश की थी। भिंड विधानसभा से उदयभान सिंह तो जीत गए, लेकिन भूता को दोबारा विधायक बनने का मौका नहीं मिला। राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होती थी भूता कोठी....गुजराती वैश्य नवीनचंद भूता के पिता स्वतंत्रता सेनानी हरि किशनदास जाधवजी भूता तत्कालीन मध्यभारत की राजनीति में खासा दखल रखते थे। शहर की विशाल भूता कोठी प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र होती थी। देश-प्रदेश के बड़े-बड़े कांग्रेस नेता भूता के साथ मशवरा करने भिंड आते थे। इनमें मध्यप्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाशचंद्र (पीसी) सेठी भी शामिल थे।  

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बिग बी के सेक्रेटरी ने कटवाया था नवीनचंद्र भूता का टिकट

हरि किशनदास जाधव भूता के 1965 में निधन के बाद उनके बड़े बेटे 36 वर्षीय नवीनचंद्र भूता को 1972 में पीसी सेठी की मदद से कांग्रेस से भिंड विधानसभा क्षेत्र से टिकट मिला और वे जीते। नवीनचंद्र भूता विधायक थे, इसलिए कांग्रेस ने उन्हें 1977 में पुन: टिकट दिया, लेकिन वह जनता पार्टी की ओम कुमारी कुशवाह से हार गए। बाद में प्रकाशचंद्र सेठी को कांग्रेस हाईकमान ने केन्द्र में मंत्री बना दिया।

आज भी चर्चा में रहता है भिंड....
मुख्यमंत्री पद पर श्यामाचरण शुक्ल आसीन हुए तो समीकरण बदल गए। इसके बाद वर्ष 1985 में नवीनचंद्र भूता को कांग्रेस ने फिर चुनाव प्रत्याशी घोषित किया, लेकिन पार्टी ने ऐनवक्त पर उनका टिकट काटकर जिला न्यायालय के युवा वकील उदयभान सिंह कुशवाह को दे दिया। सिफारिश इनके नाम की ही आई थी। भिंड के सियासी इतिहास का ये घटनाक्रम आज भी चुनाव के वक्त चर्चा में रहता है।

ऐसे बदली परिस्थिति....
नवीन भूता के पुत्र संजय भूता बताते हैं कि अमिताभ ब"ान के उस समय पीए (जो उदयभान सिंह के परिवार से जुड़ा हुआ था) के कहने से अमिताभ ने अपने मित्र राजीव गांधी से उदयभान सिंह को टिकट देने की सिफारिश कर दी थी, इसलिए उनके पिता का टिकट कट गया। परिस्थितियां बदलीं। पीसी सेठी के स्थान पर श्यामाचरण शुक्ल सीएम बने। 1989 में उन्होंने चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी को टिकट दिया और नवीन भूता की फिर टिकट मिलने की उम्मीदें धूमिल होती चली गईं।
(जैसा भिंड में संजय भूता ने रामानंद सोनी को बताया।)