
ऐसी भी श्रद्धाः मन्नत पूरी होने पर देवी मां को चढ़ती है अनोखी चीज
'आस्था' यह शब्द देखने में और बोलने में जितना छोटा लगे, इसका अर्थ बेहद बढ़ा है। लोगों की आस्था ही है कि हम कहते हैं कि 'ईश्वर इस दुनिया' में है। इसके अलावा एक आस्था यह भी है कि हम जूते-चप्पलों के साथ मंदिर की सीढ़ियां भी नहीं चढ़ सकते।
भोपाल। 'आस्था' शब्द देखने में और बोलने में जितना छोटा लगे, इसका अर्थ काफी बढ़ा है। हम जूते-चप्पलों के साथ मंदिर की सीढ़ियां भी नहीं चढ़ सकते। यदि गलती से सीढ़ियां भी चढ़ जाएं तो इसे ईश्वर का अपमान माना जाता है। लेकिन, इस मंदिर में अनोखी आस्था है। यहां दुर्गा मां की मूर्ति तक चप्पल और तरह-तरह की आकर्षक सैंडिल चढ़ाने की परंपरा है। माना जाता है कि जिनकी मनोकामना पूरी हो जाती है वे माता को सैंडिल चढ़ाता है।
mp.patrika.com नवरात्र के मौके पर आपको बता रहा है मध्य प्रदेश के ऐसे अनोखे मंदिर के बारे में, जहां माता के प्रति अनोखी आस्था देखने को मिलती है। आइए जानते हैं भोपाल के जीजा बाई मंदिर के बारे में...।
मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के कोलार क्षेत्र में एक पहाड़ी पर है जीजी बाई का यह मंदिर। नवरात्र में माता के दरबार में भक्तों की भीड़ लगी रहती है। इस बार भी गुप्त नवरात्रि के मौके पर यहां सैकड़ों भक्त माता के दरबार में पहुंचेंगे।
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विदेशों से भक्त भेजते हैं माता के लिए सैंडिल
यहां के महाराज ओम प्रकाश के अनुसार यहां आने वाले कुछ भक्त विदेश में बस गए, लेकिन वे नहीं आ पाते। इसलिए किसी रिश्तेदार के हाथों या डाक से माता के लिए सैंडिल भिजवा देते हैं। यहां काफी समय से सैंडिल चढ़ाने की परंपरा है।
घड़ी, चश्मा और टोपी भी चढ़ाते हैं लोग
ओम प्रकाश महाराज के मुताबिक गर्मी के मौसम में इस मंदिर में चप्पल के साथ-साथ चश्मा, टोपी और घड़ी भी चढ़ाई जाती है। महाराज बताते हैं कि मां दुर्गा की देखभाल एक बेटी की तरह की जाती है। कई बार उन्हें ये आभास होता है कि देवी खुश नहीं हैं, तो दिन में दो-तीन घंटे के बाद माता के कपड़े भी बदल दिए जाते हैं।
20 सालों से है ऐसी मान्यता
जीजी बाई का यह मंदिर एक छोटी-सी पहाड़ी पर है। इस मंदिर को लोग सिद्धदात्री पहाड़ावाला मंदिर भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि तक़रीबन 20 साल पहले ओम प्रकाश नाम के एक महराज ने मूर्ति स्थापना की थी। कहा जाता है कि इस महराज ने तब शिव-पार्वती का विवाह कराया था और खुद कन्यादान किया था। तब से ओम महाराज मां सिद्धदात्री को अपनी बेटी मानकर पूजा करते हैं।
Updated on:
13 Oct 2018 12:06 pm
Published on:
12 Oct 2018 06:00 am
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