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नई सुविधा; अब नवजात के मूवमेंट से ही पता लग जाएंगी बीमारियां, नहीं कराना होगा टेस्ट

देशभर के डॉक्टरों को देंगे ट्रेनिंग, जन्मजात न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का लगेगा पता

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जन्मजात न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का लगेगा पता

भोपाल. अब बच्चों के जन्म के साथ उनके मूवमेंट से पता लगाया जा सकेगा कि उनमें कोई जन्मजात न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर तो नहीं है। यह पता करने के बाद डॉक्टर समय पर इलाज कर सकेंगे। नई तकनीक से टेस्ट की जरूरत नहीं होगी। इसके सफल होने से बच्चों के जेनेटिक और ब्लड टेस्ट से बचा जा सकेगा

अभी पांच माह से एक साल के बच्चों के अनुवांशिक, सैरेब्रल पॉल्सी या अन्य न्यूरो से जुड़ी बीमारियों की जानकारी जल्द नहीं मिलती. इन बीमारियों की जानकारी अभी सीटी स्कैन, एमआरआइ जैसी तकनीकों से ही मिलती है। नई तकनीक से इन सब टेस्ट की जरूरत नहीं होगी।

ऑस्ट्रिया की प्रो.क्रिस्टा आइंस्पीलरस ने एम्स डाक्टर्स को इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया- इस संबंध में जोधपुर एम्स में न्यूरो पीडियाट्रिशियन डॉ. लोकेश सैनी ने बताया कि हाल ही एम्स में डाक्टर्स को इसके बारे में अवगत कराया गया. ऑस्ट्रिया की प्रो.क्रिस्टा आइंस्पीलरस ने एम्स डाक्टर्स को इस नई तकनीक का प्रशिक्षण दिया। अब इसे साइंस और जनरल मूवमेंट ऑफ असेसमेंट कोर्स के तहत देश के अलग-अलग संस्थान के डॉक्टरों को पढ़ाया जाएगा।

इसके सफल होने से बच्चों के जेनेटिक और ब्लड टेस्ट से बचा जा सकेगा- एम्स के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. गिरीश चंद्रा भट्ट ने कहा कि यह एक रिसर्च है। इसके सफल होने से बच्चों के जेनेटिक और ब्लड टेस्ट से बचा जा सकेगा।

यह होंगे फायदे
जन्म के बाद से बच्चों पर इस तकनीक से नजर रखने से मानसिक विकार जल्द पकड़ा जा सकेगा।
नई तकनीक से बच्च्चे को जल्द मेडिसिन और थैरेपी मिल सकेगी। इससे जल्दी उपचार शुरू हो सकेगा।

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