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एनजीटी ने जिले के नगरीय निकायों पर 4.80 करोड़ की पेनाल्टी लगाई

एनजीटी(नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने जिले की नगरीय निकायों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर साढ़े चार करोड़ से अधिक की पेनाल्टी लगाई है।

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नोटिस मिलने के बाद बैतूल नगरपालिका ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया

Betul Municipality approached the court after receiving the notice

बैतूल। एनजीटी(नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) ने जिले की नगरीय निकायों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति के तौर पर साढ़े चार करोड़ से अधिक की पेनाल्टी लगाई है। आदेश में कहा गया है कि बैतूल नगरीय निकाय बायोरेमिडेशन और एसटीपी का निर्माण करने में विफल रही है और नदियों में सीधे सीवेज छोड़ा गया है। जिसके चलते उन पर यह जुर्माना लगाया गया है। एनजीटी के सदस्य चंद्रमोहन ठाकुर ने कहा है कि जुर्माने की राशि नगरीय निकायों को 15 दिनों के भीतर जमा करना होगी। यदि निकाय आदेशों की अव्हेलना करते हैं तो ऐसी दशा में अधिकारियों के विरूद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएंगे।

2021 के दर्ज प्रकरण में जारी नोटिस
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने वर्ष 2021 के दर्ज प्रकरण में फैसला सुनाते हुए यह आदेश जारी किए हैं। बताया गया कि प्रकरण की सुनवाई के दौरान समय-समय पर नगरीय निकायों को नोटिस जारी किए गए थे, लेकिन निकायों ने इन नोटिसों कोई लिखित जवाब नहीं दिया और न ही इस ओर ध्यान दिया गया। जिसके चलते प्रकरण की सुनवाई में निकायों का कोई पक्ष सामने नहीं आ सका। निकायों की इस लापरवाही के चलते ट्रिब्यूनल ने समस्त निकायों पर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित कर दी। लाखों रुपए की पेनाल्टी लगने के बाद नगरीय निकायों में अब हडक़ंप की स्थिति देखी जा रही है।

राशि जमा नहीं कराई तो अपराधिक प्रकरण होगा दर्ज
एनजीटी ने स्थानीय निकायों से निर्धारित पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की राशि 15 दिन के भीतर बोर्ड के खाते में जमा कराने के निर्देश जारी किए हैं। यदि नगरीय निकाय समय-सीमा में राशि जमा नहीं कराते हैं और आदेशों की अव्हेलना की जाती हैं तो ऐसी स्थिति में अधिकारियों के विरूद्ध पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 की धारा 15, 16 एवं राष्ट्रीय हरित अधिनियम 2010 की धारा 26 सहपठित धारा 30 के तहत अपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने के आदेश दिए गए हैं। बताया गया कि एक नगरीय निकाय के अधिकारी पर अपराधिक प्रकरण भी दर्ज किया गया है।

नोटिस मिलने के बाद नपा न्यायालय की शरण में
एनजीटी ने बैतूल नगरपालिका पर 66 लाख का जुर्माना अधिरोपित किया गया है। वहीं सारणी नगर पालिका पर 1.20 करोड रुपए का जुर्माना लगाया गया है, जबकि अन्य निकायों पर भी 66-66 लाख रुपए का जुर्माना किया गया है। एनजीटी का नोटिस मिलने के बाद नगर पालिकाओं में हडक़ंप मच गया है। निकाय जुर्माने की राशि जमा करने से बचने के लिए विभाग से पत्राचार कर मार्गदर्शन मांग रहे है, लेकिन नगर पालिकाओं को राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। इधर बैतूल नगपालिका ने एनजीटी की इस कार्रवाई के विरूद्ध न्यायालय में जाने का निर्णय लिया है।
एनजीटी ने इसलिए लगाया जुर्माना
1. बायोरेमिडेशन: इसका मतलब जैव उपचार होता है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें सूक्ष्मजीवों का प्रयोग कर पर्यावरणीय प्रदूषकों को कम करने या रोकने का कार्य किया जाता है। यह तकनीक मुख्यत: इस आधार पर कार्य करती है कि सूक्ष्म जीवों में जैविक यौगिकों को नष्ट करने की असीमित क्षमता होती है। नगरपालिका को ट्रेंचिंग ग्राउंड पर जैव उपचार किया जाना था लेकिन नहीं कराया गया। जिसके चलते जुर्माने की कार्रवाई की गई।
2. सीवरेज सिस्टम का अभाव: इसका अर्थ तरल अपशिष्ट का उपचार करना और इसका निपटान करना है। सीवर प्रणाली में अपशिष्टा का संग्रहण, उपचार औश्र निपटान करने के लिए आवश्यक सभी भौतिक संरचनाएं शामिल होती है। नगरपालिका ने सीवरेज के निष्पादन के लिए कोई ट्रीटमेंट प्लांट तैयार नहीं किया था। खुले में सीवरेज जमा किया जा रहा था। जिसके चलते जुर्माने की कार्रवाई की गई।
3. एसटीपी का निर्माण नहीं करना: नालों को टैप कर गंदा पानी सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) में शोधन के लिए भेजा जाता है। ट्रीटमेंट के बाद इस पानी का उपयोग अन्य कार्यों के लिए होता है लेकिन नगरपालिका ने एसटीपी का निर्माण नहीं कराया और गंदा पानी नदियों में छोड़ा जा रहा था। इसलिए पयार्वरणीय क्षति के रूप में जुर्माने की कार्रवाई की गई।