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कॉलेजों में जनभागीदारी समिति अध्यक्षों का मनोनयन निरस्त

कांग्रेस विधायकों, नेताओं को मिला था मौका

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कॉलेजों में जनभागीदारी समिति अध्यक्षों का मनोनयन निरस्त

कॉलेजों में जनभागीदारी समिति अध्यक्षों का मनोनयन निरस्त

भोपाल। राज्य सरकार ने प्रदेश के सरकारी महाविद्यालयों में जनभागीदारी समितियों के मनोनय को निरस्त कर दिया है। कमलनाथ सरकार ने इनकी नियुक्तियां की थीं। इसमें कांगे्रस विधायकों और कांग्रेस नेताओं को मौका मिला था।

कमलनाथ सरकार ने आखिरी दौर में ताबड़ातोड़ ढंग से राजनीतिक नियुक्तियां, मनोनयन किए थे। आयोगों में अध्यक्ष बनाए गए, वहीं निकायों, परिषदों सहित अन्य संस्थाओं में राजनैतिक नियुक्तियां की गई। सत्ता परिवर्तन के साथ ही भाजपा सरकार ने ज्यादातर आयोगों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया। अन्य नियुक्तियों को भी निरस्त किए जाने की कार्यवाही शुरू की गई।

कोरोना महामारी से बचाव के बीच सरकारी दफ्तरों में काम-काज शुरू होते ही सरकार ने अन्य राजनीतिक नियुक्तियों की फाइलें खंगाली। मुख्यमंत्री सचिवालय ने सभी राजनीतिक नियुक्तियां निरस्त करने के आदेश दिए। इसी के तहत सामान्य प्रशासन विभाग ने 20 अप्रेल को सभी विभागों को आदेश दिए कि वे अपने अधीनस्थ निगम-मण्डलों, निकायों, परिषदों सहित अन्य संस्थाओं में हुई राजनीतिक नियुक्तियेां को निरस्त कर दें। इसी कड़ी में उच्च शिक्षा विभाग ने प्रदेश के सरकारी और स्वशासी महाविद्यालयों में राजनैतिक नियुक्तियोंं को निरस्त कर दिया। इस आदेश में विभाग ने 20 मार्च के आदेश का जिक्र भी किया है।