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भोपाल। भारत में हुई नोटबंदी में 8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 के पुराने नोट चलन से बाहर कर दिए गए थे। राजधानी भोपाल समेत पूरे प्रदेश में अचानक नोटबंदी से लोगों का बुरा हाल था। आपने लंबी-लंबी कतारों में खड़े होकर अपने पैसे बैंक में जमा कर दिए। पर क्या आपको पता है कि नोटबंदी के समय आपके लिए बेकार हुई इस भारतीय करेंसी का बैंक क्या कर रहे हैं।....क्या रिसाइकल...अरे नहीं रिसाइकल नहीं हुई हमारी करेंसी...बल्कि अफ्रीका पहुंच रही है..और वहां ये किस काम आ रही है...जानने के लिए जरूर पढ़ें ये खबर...
अचानक नोटबंदी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ मध्यम और गरीब तबका। अपनी जमा पूंजी को बैंकों में जमा करने पहुंचे लोगों का हाल बुरा था। राजधानी भोपाल के हर बैंक के बाहर सड़क तक लाइनें लगी थीं।
लोग तो परेशान थे ही बैंक कर्मचारियों का भी हाल बुरा था। पर आपको जानकर हैरानी होगी कि जिस राशि को जमा करवाने आप बैंक पहुंचे और लंबी-लंबी कतारों में लगकर एक या दो दिन नहीं बल्कि सप्ताह भर तक बैंकों के चक्कर काटे...तब जाकर बंद हुए ये नोट बैंकों में जमा हुए। केंद्र सरकार के आदेश के बाद इन 500 और 1000 के नोटों को दक्षिण अफ्रीका भेजा जा रहा है। जहां ये नोट चुनावी माहोल में प्रचार-प्रसार के काम आने वाले हैं। कैसे आइए हम बताते हैं...
दरअसल केरल की कंपनी वेस्टर्न इंडियन प्लाइवुड लिमिटेड ने नवंबर 2016 से ही इन नोटों के हार्ड बोर्ड बनवाने शुरू कर दिए। रिसाइक्लिंग के बाद बेकार हुई हमारी जमा पूंजी को हार्ड बोर्ड का रूप दे दिया गया। सूत्रों के मुताबिक 2019 में दक्षिण अफ्रीका में चुनाव होने हैं और यह हार्ड बोर्ड उसी दौरान काम आएंगे।
आरबीआई को मिले थे 800 टन नोट
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के तिरुवनंतपुरम स्थित क्षेत्रीय दफ्तर से उन्हें तकरीबन 800 टन के बंद किए गए नोट मिले थे। 1945 में इस कंपनी की स्थापना कन्नूर के वलापट्टनम में हुई थी, जो प्लाईवुड, ब्लॉक बोर्ड और फ्लश डोर तैयार करती है।
Updated on:
08 Nov 2017 01:46 pm
Published on:
08 Nov 2017 12:14 pm
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