- प्रदूषण को रोकने और वन्य प्राणियों के रहन-सहन में व्यवधान को रोकने का अभिनव प्रयास - वर्तमान में सभी नेशनल पार्कों में रोज करीब १५ से २० वाहन शफारी के रूप में अलग अलग क्षेत्रों से प्रवेश करते हैं
भोपाल। नेशनल पार्क और टाइगर रिजर्व में पेट्रोल और डीजल से चलने वाले वाहन प्रवेश नहीं कर पाएंगे। पेट्रोलिंग से लेकर पर्यटकों को सफारी करने वाले सभी वाहन भी इलेक्ट्रिक होंगे। वन विभाग ने ये प्रयास पार्कों को प्रदूषण से मुक्त रखने और वन्य प्राणियों के रहन सहन में व्यवधान को रोकने के लिए किए हैं। वर्तमान में सभी नेशनल पार्कों में रोज करीब १५ से २० वाहन शफारी के रूप में अलग अलग क्षेत्रों से प्रवेश करते हैं।
पार्क प्रबंधन ने सफारी कराने वाली सभी समितियों से इलेक्ट्रिक व्हीकल के प्रबंध में प्रस्ताव तैयार करने के लिए कहा है। इस आधार पर पेट्रोल और डीजल से चलने वाल वाहनों की जगह पर इलेक्ट्रिक व्हीकल को चलाया जाएगा। प्रस्ताव में यह देखा जाएगा कि इलेक्ट्रिक व्हीकल को एक बार चार्ज करने पर कितने किलोमीटर तक चलाया जा सकता है, जो वाहन सफारी के रूप में उपयोग किए जाएंगे उनकी क्षमता पहाडियों में चढऩे की होगी या नहीं होगी। इसके अलावा बिजली नहीं होने पर उनके चार्जिंग की क्या व्यवस्था होगी, इन सभी बातों को लेकर प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
लगाए जाएंगे सोलर पैनल
पार्कों में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे। जिससे सफारी को चार्ज किया जा सके। ये सोलर सिस्टम पार्क के सभी प्रवेश द्वारा पर लगाए जाएंगे, जिससे बिजली नहीं होने पर सोलर लाइट जलाई जा सके और इलेक्ट्रिक व्हींकल भी इसी से चार्ज किया जा सके। बताया जाता है कि इस तरह के प्रयोग पार्कों के कुछ प्रवेश द्वार पर किए जाएंगे। प्रयोग सफल होने पर सभी गेटों में इस तरह की व्यस्था की जाएगी।
अनुदान की होगी व्यवस्था
वाहन खरीदने पर पर्यटन समितियों को अनुदान की भी व्यवस्था की जाएगी। पार्क प्रबंधन और समितियां यह तय करेंगी कि प्रति वाहन कितना अनुदान दिया जा सकता है। हालांकि यह अनुदान समितियों की वित्तीय स्थिति पर निर्भर करेगा। लेकिन जिन समितियों की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं है वहां वाहन खरीदने के लिए अनुदान विभाग के जरिए दिया जा सकेगा, जिससे कि पार्कों में इलेक्टिक व्हीकल चलाया जा सके। वाहन खरीदने के लिए लोन उपलब्ध कराने के लिए भी पार्क प्रबंधन सहयोग करेगा।