
बूढ़े मां-बाप को सबसे ज्यादा दुत्कार
भोपाल. बचपन में जिन उंगलियों को पकड़कर बच्चे चलना सीखते हैं, उनमें से कुछ बच्चे बड़े होकर उन्हीं बुजुर्गों के अरमानों को तोड़ने लगते हैं। कई मामलों में तो ऐसी स्थिति बन जाती है कि वे उन्हें घर से भी बेघर कर देते हैं। अगर साथ रहते हैं तो आए दिन के झगड़े से बुजुर्ग इस कदर परेशान हो जाते हैं कि उन्हें कलेक्टोरेट की जनसुनवाई में जाकर आवेदन करने पड़ते हैं। बुजुर्ग मां बाप, बेटे और बहुओं की प्रताडऩा से बचाने के लिए अफसरों से गुहार लगा रहे हैं।
कलेक्टर भी ऐसे मामलों को प्राथमिकता पर रखते हैं। सबसे ज्यादा भरण पोषण के मामले गोविंदपुरा एसडीएम सर्किल में ही आते हैं। यहां 80 फीसदी भरण पोषण के केसों में रिश्तों के तार फिर से जोड़े जा रहे हैं। इसके बाद बैरागढ़ सर्किल का नंबर है। जबकि, कोलार, हुजूर, बैरसिया तहसील में वर्षों में इक्का दुक्का केस ही सामने आते हैं।
बंगले में रहने वाली मां किराए के छोटे मकान में रहने को मजबूर
63 साल की आवेदिका शशि राठौर की भी कुछ ऐसी ही कहानी है. कभी बंगले में रहनेवालीं शशि राठौर अब किराए के छोटे से कमरे में रहने को मजबूर हैं. उनकी तरफ से पुत्र और बहुओं के द्वारा मारपीट करने, घर से बेघर करने संबंधित शिकायत कलेक्टर से की गई थी। शशि के पति ने कोहेफिजा स्थित बीडीए कॉलोनी में एक प्लॉट खरीदकर उस पर मकान बनवाया था। इसमें पांच कमरे, दो किचिन, तीन बाथरूम हैं। पति के नाम से इमामी गेट पर कपिल ऑटो पार्टस की दुकान है, जिसका संचालन बड़ा बेटा कपिल करता है। बेरिंग हाउस का संचालन मिथुन करता है। पुत्रों ने उन्हें घर से बेदखल कर दिया है। एसडीएम ने सुनवाई के बाद दोनों बेटों को कपिल और मिथुन को बुलाया। एसडीएम ने आदेश देते हुए दोनों को भरण पोषण के तहत पांच-पांच हजार रुपए देने का आदेश सुनाया।
सरकारी नौकरी में दो बेटे फिर भी बुजुर्ग मां को कर रहे परेशान
पिता की मृत्यु के बाद अस्सी वर्षीय बुजुर्ग मां मीरा नागदेव की सेवा करने की जगह दो बेटे परेशान करने लगे। यही नहीं मकान की रजिस्ट्री भी छोटे बेटे ने अपने कब्जे में ले ली। खास बात तो यह है कि उसी मां की सेवा के लिए मझले बेटे ने सीआईएसफ की नौकरी छोड़ दी और सेवा करने भोपाल आ गया। इधर रोजाना बड़े और छोटे बेटों के द्वारा विवाद करने से परेशान बुजुर्ग महिला ने भरण पोषण के तहत आवेदन किया। यहां मां ने बेटों से उनका मकान मुक्त कराने और भरण पोषण दिलाने की गुहार लगाई। एसडीएम ने दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद बड़े और छोटे बेटे को घर से बेदखल करने का आदेश सुनाया है।
गोविंदपुरा के एसडीएम मनोज वर्मा के मुताबिक भरण पोषण के तहत बुजुर्ग या अन्य आश्रित आवेदन कर सकते हैं। इस एक्ट में काफी प्रावधान हैं। ये बुजुर्गों के लिए काफी लाभदायक है। हम माह में एक दो आदेश इसके तहत देते हैं। कई जगह लोग आसानी से मान जाते हैं, तो कुछ को एक्ट की ताकत बताकर समझाइश दी जाती है। ऐसे में कुछ परिवार जुड़ भी जाते हैं।
Published on:
02 Dec 2022 03:28 pm

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