
भोपाल. मध्यप्रदेश भाजपा का आॅपरेशन होने की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश अध्यक्ष बदलने की अटकलों के बीच में केंद्रीय नेतृत्व ने साफ कर दिया है कि प्रदेश प्रभारी की भी रवानगी होगी। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुदृे की जगह दूसरे बड़े नेता को यहां की कमान दी जाएगी। जिन नामों पर बात हो रही है उनमें भूपेंद्र यादव और ओम माथुर का नाम सामने आ रहा है। भूपेंद्र यादव जहां गुजरात के प्रभारी हैं तो वहीं ओम माथुर उत्तर प्रदेश के प्रभारी रहे हैं और कई बार राजस्थान के मुख्यमंत्री के लिए उनका नाम चर्चाओं में आया है।
दरअसल, प्रदेश में लगातार हो रहे चुनावों में भाजपा का ग्राफ गिरता नजर आ रहा है। पहले अटेर विधानसभा उपचुनाव में हार मिली। उसके बाद चित्रकूट और उसके बाद नगरीय निकाय की कुछ सीटों पर मतदान हुआ, वहां भी भाजपा को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा है। इन सबको देखने के बाद भाजपा ने प्रदेश नेतृत्व के भीतर सर्जरी करने की तैयारी शुरू कर दी है। कहा जा रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार सिंह चौहान की रवानगी हो सकती है।
तो यह होंगे चेहरे
अगर नंद कुमार की रवानगी होती है तो संभावित प्रदेश अध्यक्ष के दावेदारों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर का नाम सबसे आगे है। उनके अलावा जिन नामों पर चर्चा हो रही है, उनमें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा, जबलपुर सांसद राकेश सिंह, प्रदेश सरकार के मंत्री नरोत्तम मिश्रा और गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह का भी नाम शामिल है। हालांकि यह सभी नेता खुद को इस दौड़ से बाहर होने की बात करते हैं, लेकिन अंदरखाने की हकीकत दूसरी है। हर कोई चुनावी साल में प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर बैठना चाहता है। हालांकि एक बात पूरी तरह से साफ मानी जा रही है कि प्रदेश अध्यक्ष के चयन में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की भूमिका अहम रहेगी।
पक्षपात के आरोपों से घिरे हैं विनय सहस्त्रबुदृे
भाजपा के प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुदृे शुरुआती दौर से ही विवादों में घिर गए। उन पर कुछ लोगों के लिए पक्षपात करने का आरोप लगा। उसके बाद उनकी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से दूरियां भी चर्चा का विषय रहीं। जिस तरह से विनय सहस्त्रबुदृे मध्यप्रदेश में प्रदेश प्रभारी बनकर आए और शिवराज से उनकी नजदीकियां बनीं। उससे ज्यादा तेजी से उन दोनों के बीच तल्खियां भी बनीं। इसके पीछे एक दूसरे का काम करने का तरीका था। यही वजह है कि कुछ समय के बाद प्रदेश प्रभारी ने मध्यप्रदेश के मामलों में दखलंदाजी कम कर ली। कई बड़े मामलों में उनका हस्तक्षेप शून्य ही हो गया। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने उन्हें बदलने के अलावा और कोई विकल्प शेष नहीं रहा।
चुनावी रणनीति जमाएंगे
भाजपा अब जिन नामों पर विचार कर रही है, उनमें भूपेंद्र यादव एक वो नाम है जिसे मध्यप्रदेश के लिए सबसे मजबूत मानकर देखा जा रहा है। भाजपा भूपेंद्र यादव के नाम से पिछड़ों को साधने का भी काम कर सकती है। बल्कि उनका गुजरात में जो अनुभव रहा है, उसका फायदा भी यहां पर ले सकती है। गुजरात में भाजपा को बहुत ही कड़ा मुकाबला झेलना पड़ा है। अब इस साल यहां पर भी चुनाव हैं, ऐसे में मजबूत विकल्प के तौर पर भूपेंद्र यादव का नाम चल रहा है। दूसरा जो नाम है, वह ओमप्रकाश माथुर का है। राजस्थान के रहने वाले हैं और उत्तर प्रदेश में प्रदेश भाजपा के प्रभारी रहे हैं। उनके दौर में ही भाजपा ने लोकसभा में जोरदार प्रदर्शन किया था। उसी प्रदर्शन के बाद उनका नाम राजस्थान के सीएम के लिए भी उछला था, हालांकि उन्हें कुर्सी अभी तक नसीब नहीं हुई है। ऐसे में संभव है कि भाजपा उन भी दाव खेल सकती है। सबसे खास बात यह है कि यह दोनों नेता पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की पहली पसंद में आते हैं। या कहें कि इन दोनों नेताओं के जरिए अमित शाह यहां के संगठन पर अपनी सीधी पकड़ बना सकते हैं।
Published on:
23 Jan 2018 04:14 pm
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