कोलार में सीपीए ने एक हजार पौधे रोपने का किया था दावा, देखरेख नहीं होने से बचे हैं महज सौ
भोपाल/कोलार. शहर को हराभरा बनाने के लिए हरियाली महोत्सव एवं मानसून सत्र में हजारों पौधे रोपे जाने की बात विभिन्न सरकारी एजेंसियों द्वारा की जाती है, पर जितने पौधे रोपने का दावा किया जाता है उतने धरातल पर नजर नहीं आते हैं, वहीं पौधरोपण के बाद बरती गई लापरवाही भी शहर को हराभरा बनाने के सपने को तोड़ रही है। ताजा मामला कोलार स्थित अकबरपुर का है। यहां सीपीए वषज़् 2009 में एक हजार से अधिक पौधे रोपे थे, पर देखरेख नहीं होने से इसमें से महज सौ पौधे ही बचे हैं। ये स्थिति तब है जब पौधों की सुरक्षा के लिए यहां फैंसिंग पर भी मोटी राशि खचज़् की गई थी।
जालियां तोड़ी, मवेशियों की एंट्री
वाडज़् 80 स्थित बंजारी दशहरा मैदान के पास खसरा नंबर तीन में वषज़् 2009 में सीपीए द्वारा एक हजार पौधे रोपे गए थे, इसकी तस्दीक यहां लगा बोडज़् कर रहा है, पर इस जमीन पर पौधे दूर-दूर तक देखने नहीं मिलते। कहीं कहीं कुछ पौधे जरूर हैं। यहां सुरक्षा के लिए लगाई गई फैंसिंग को असामाजिक तत्वों ने उखाड़ दिया है, जिसके कारण यहां मवेशियों की बेरोकटोक एंट्री बनी रहती है।
पौधों को नहीं मिला पानी
स्थानीय रहवासियों के मुताबिक सीपीए ने यहां पौधरोपण कर फैंसिंग तो की थी, पर पौधों के लिए पानी की व्यवस्था नहीं की गई, नतीजतन अधिकतर पौधे तो पानी नहीं मिलने के कारण सूख गए, वहीं शेष मवेशी चट कर गए। फिलहाल इस स्थान का उपयोग कचराघर के रूप में किया जा रहा है। यहां जगह-जगह लगे कचरे के ढेर गंदगी और बदबू की मुख्य वजह बने हुए हैं। सीपीए वर्ष 2009 में एक हजार से अधिक पौधे रोपे थे, पर देखरेख नहीं होने से इसमें से महज सौ पौधे ही बचे हैं। ये स्थिति तब है जब पौधों की सुरक्षा के लिए यहां फैंसिंग पर भी मोटी राशि खर्च की गई थी।
मैंने आज ही चार्ज लिया है, इसलिए इस संबंध में फिलहाल कुछ नहीं कह सकता। मामले को दिखवाता हूं और यथासंभव कारज़्वाई की जाएगी।
अनिल शर्मा, रेंजर,इकाई एक, सीपीए