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एक दिन में बदल जाता है इस साड़ी का कलर.. देखें क्या है मामला!

जीटीबी स्थित मृगनयनी में चंदेरी उत्सव का आयोजन

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sadi

भोपाल। हस्तशिल्प एवं हाथकरघा विकास निगम जीटीबी कॉम्प्लेक्स स्थित मृगनयनी एम्पोरियम में चंदेरी उत्सव का आयोजन कर रहा है। यहां चंदेरी के कलाकार अशरफी बुटी, जुगनु डिजाइन और झांसी की रानी बुनाई डिजाइन जैसे खास वर्क लेकर आए हैं। इनमें से सबसे खास है मसलीन दो चश्मा डिजाइन। एक साड़ी को तैयार करने में 90 दिन का समय लगता है। इसे हाथ से तैयार किया जाता है। इसकी खासियत है कि इसे दोनों तरफ से पहना जाता है। इसलिए इसे लेकर कहा जाता है कि इस साड़ी का कलर एक दिन में बदल जाता है।

जुगनु की तरह चमकती है बूटी
वहीं आवेरवा(जुगनु बूटी) में कपड़ा और बूटी को एक साथ तैयार किया जाता है। कपड़े पर अलग से वर्क नहीं होने के कारण ये काफी अट्रैक्टिव लगता है। एक साड़ी को तैयार करने में कम से कम 20 दिनों का समय लगता है। पहले जुगनु बुटी पर सोने का वर्क किया जाता था, लागत कम करने के लिए अब इस पर पीतल का वर्क किया जाता है। इस पर करीब 50 ग्राम पीतल की जरी होती है।

घासीराम ने तैयार की थी पहली साड़ी
इस साड़ी को सबसे पहले चंदेरी के घासीराम ने तैयार किया था। घासीराम पहले राजघरानों के लिए साड़ी की डिजाइन तैयार करते थे। चंदेरी सिल्क के कारीगर सकुर खान का कहना है कि मसलीन दो चश्मा डिजाइन को आंध्र प्रदेश के कोलीकुंडा में बनने वाले कतान सिल्क से तैयार किया जाता है। इस तरह की साडिय़ों को एक ही कारीगर तैयार करता है। इसलिए इसे एकनलिया डिजाइन भी कहा जाता है।

घासीराम ने तैयार की थी पहली साड़ी
इस साड़ी को सबसे पहले चंदेरी के घासीराम ने तैयार किया था। घासीराम पहले राजघरानों के लिए साड़ी की डिजाइन तैयार करते थे। चंदेरी सिल्क के कारीगर सकुर खान का कहना है कि मसलीन दो चश्मा डिजाइन को आंध्र प्रदेश के कोलीकुंडा में बनने वाले कतान सिल्क से तैयार किया जाता है। इस तरह की साडिय़ों को एक ही कारीगर तैयार करता है। इसलिए इसे एकनलिया डिजाइन भी कहा जाता है।