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भोपाल में हो रही पं. प्रदीप मिश्रा की कथा, घर-घर पहुंचाएंगे रुद्राक्ष, जानिए असली और नकली में फर्क !

-कथावाचक पं. प्रदीप मिश्रा भोपाल में पहली बार शिव महापुराण सुना रहे हैं-कथा करोंद क्षेत्र में 10 जून से शुरू होगी, जो 14 जून तक चलेगी।

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Pandit Pradeep Mishra

भोपाल। राजधानी में पहली बार सीहोर कुबेरेश्वर धाम के पंडित प्रदीप मिश्रा शिव महापुराण कर रहे हैं। कथा से पहले शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें पं. मिश्रा का रास्ते में कई जगहों पर स्वागत किया गया। 200 से ज्यादा सामाजिक संगठनों ने फूल बरसाकर स्वागत किया। भाजपा के संस्थापक सदस्य स्व. कैलाश सारंग एवं उनकी धर्मपत्नी स्व. प्रसून सारंग की पुण्यस्मृति में पीपुल्स मॉल के पीछे 55 एकड़ के मैदान में कथा का आयोजन कियाजा रहा है।

घर-घर बांटे जाएंगे रुद्राक्ष

चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास कैलाश सारंग ने बताया कि श्री शिव महापुराण कथा महोत्सव के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो इसके विशेष इंतजाम किए गए हैं। रुद्राक्ष वितरण को लेकर आनलाइन पंजीयन व्यवस्था की गई है। आमंत्रण पत्र पर दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन एवं मिस्डकाल कर पंजीयन किया जा रहा है। पंजीयन के बाद पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा अभिमंत्रित रुद्राक्ष घर-घर बांटे जाएंगे। इसीलिए आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि असली रुद्राक्ष की पहचान क्या होती है।

कैसे करें असली रुद्राक्ष की पहचान

1. असली रुद्राक्ष की पहचान के लिए रुद्राक्ष को पानी में डालें अगर वह रंग छोड़ रहा है तो वह नकली है और अगर नहीं छोड़ रहा है तो रुद्राक्ष असली है।

2. रुद्राक्ष को पानी में डालने पर अगर वह पानी में डूब जाए तो रुद्राक्ष असली है।

3. रुद्राक्ष को सरसों के तेल में डालने पर अगर उसका रंग एकदम गहरा हो जाए तो समझ लें कि रुद्राक्ष असली है।

4 . गहरे रंग के रूद्राक्ष को अच्छा माना जाता है और हल्के रंग वाले को नहीं। असलियत में रूद्राक्ष का छिलका उतारने के बाद उस पर रंग चढ़ाया जाता है। बाजार में मिलने वाली रूद्राक्ष की मालाओं को पिरोने के बाद पीले रंग से रंगा जाता है। रंग कम होने से कभी- कभी हल्का रह जाता है। काले और गहरे भूरे रंग के दिखने वाले रूद्राक्ष प्रायः इस्तेमाल किए हुए होते हैं, ऐसा रूद्राक्ष के तेल या पसीने के संपर्क में आने से होता है।

5 . रूद्राक्ष की पहचान सुई से भी की जाती है। अगर अगर रेशा निकले तो असली और न निकले तो नकली होगा।

6. नकली रूद्राक्ष के उपर उभरे पठार एकरूप हों तो वह नकली रूद्राक्ष है। असली रूद्राक्ष की उपरी सतह कभी भी एकरूप नहीं होगी। जिस तरह दो मनुष्यों के फिंगरप्रिंट एक जैसे नहीं होते उसी तरह दो रूद्राक्षों के उपरी पठार समान नहीं होते। हां नकली रूद्राक्षों में कितनों के ही उपरी पठार समान हो सकते हैं।

ऐसे पहचानें रुद्राक्ष और भद्राक्ष में अंतर

- असली रुद्राक्ष के फल में प्राकृतिक रूप से छेद होते हैं , जबकि भद्राक्ष में छेद कर इसे रुद्राक्ष के तौर पर पेश किया जाता है ।

- रुद्राक्ष की पत्तियां आरी के दांत जैसे होते हैं जबकि भद्राक्ष की पत्तियों का सिर गोलाकार होता है ।

- असली रुद्राक्ष को यदि सरसों के तेल में डूबा जाए तो यह रंग नहीं छोड़ता। नकली रुद्राक्ष रंग छोड़ सकता है ।

- पानी में डुबोने पर रुद्राक्ष डूब जाएगा जबकि नकली रुद्राक्ष पानी में डालने पर डूबेगा नहीं ।

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