
PATRIKA NEWS WRAP: वो खबरें जिन पर आज दिन भर रहेगी नजर
भोपाल। अशोका गार्डन में विश्व गुरु और राष्ट्र संत स्वामी विवेकानंद के विचारों पर आधारित थीम पार्क के गेट पर शुक्रवार को भी ताला लगा रहा। यहां सुरक्षा के लिए ग्वालियर की १८वीं बटालियन का कैंप लगा दिया गया। डायल १०० और स्थानीय पुलिस की पहरेदारी रही। प्रशासन ने विवेकानंद की मूर्ति सहित पार्क को ताले में कैद कर दिया। अपराह्न करीब ३ बजे विश्वास सारंग की आपत्ति के बाद ताला खोल दिया गया, लेकिन प्रशासन ने फिर से यहां ताला डाल दिया।
लोकार्पण होने के बाद भी इसमें जनता की आवाजाही पर पाबंदी है। गेट पर पुलिस का कैंप-पहरा और ताला होने पर स्थानीय जनता एक ही सवाल उठा रही है कि क्या यह पार्क भाजपा-कांग्रेस पार्टी के पैसों से विकसित किया गया है जो लोकार्पण के बाद भी जनता के लिए नहीं खोला गया है। स्थानीय लोगों की मांग है कि जनता के पैसे से पार्क का निर्माण किया गया है, तो इसे जनता के हवाले किया जाए।
स्वामी विवेकानंद के नाम और उनके अमूल्य वाक्यों से पार्क को सजाया गया हैं, ताकि आम लोग अपने जीवन में उन वाक्यों का अमल करें, लेकिन इसे भूलकर राजनीति की जा रही है। हालांकि देर शाम को सारंग की आपत्ति और राज्यपाल को की गई शिकायत के बाद पार्क का ताला खोल दिया गया है।
श्रेय की होड़ में जनता परेशान, बच्चे कर रहे सवाल
पार्क के लोकार्पण को लेकर दोनों ही पार्टियों ने राजनीति की। दोनों ने ही अपने-अपने तरीके से लोकार्पण कर दिया। लेकिन जनता को परेशानी में डाल दिया। यहां पुलिस की तैनाती से डर पैदा हो रहा है। लोगों का कहना है कि उनके बच्चे पूछ रहे हैं कि पार्क बनते ही यहां पुलिस क्यों आ गई?। पुलिस का तंबू क्यों लगाया गया? पार्क में घूमने कब जाएंगे? स्थानीय रहवासियों का कहना है कि बच्चों के इन सवालों का जवाब कैसे दिया जाए कि पार्क और विवेकानंद के नाम पर राजनीति हो रही है।
राजभवन पहुंचा पार्क का विवाद
शुक्रवार को सांसद आलोक संजर और सारंग व भाजपा का एक प्रतिनिधि मंडल ने राजभवन पहुंच कर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल से पार्क खुलवाने की मांग की। साथ ही शिकायत की कि भाजपा के जन प्रतिनिधियों पर कांग्रेस निशाना साध रही है। सारंग व भाजपा नेताओं के खिलाफ प्रकरण दर्ज करवाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि राज्यपाल ने एफआईआर को गंभीरता से लेकर पार्क के विवाद पर संज्ञान ले लिया।
सारंग ने ताला खुलवाया, फिर कुछ समय बाद फिर लगाया
शुक्रवार दोपहर करीब ३ बजे मौके पर विश्वास सारंग पहुंचे। यहां पार्क में लगा रखा ताला खुलवाया और पुलिस की तैनाती पर एतराज जताया। कहा कि यह कोई धर्म स्थल का विवाद नहीं है जो मेरे क्षेत्र को छावनी बनाया जाए। लेकिन कुछ ही देर बाद फिर प्रशासन ने यहां ताला लगवा दिया। इसके बाद शाम ७ बजे सारंग ने डीआइजी इरशाद वली से बात कर ताला खुलवाने और पुलिस हटाने को कहा।
मेरे क्षेत्र की आबोहवा बिगाड़ी जा रही है। लोकार्पण के बाद मैं शांत हो गया, जबरिया फिर लोकार्पण किया गया। बाद में यहां ताले लगाकर मेरे क्षेत्र को छावनी बना दिया गया जैसे नरेला में गुंडे-बदमाश रहते हों। मेरे व मेरे लोगों के खिलाफ एफआईआर करवा दी, इसके बाद भी कांग्रेस व पीसी शर्मा नहीं मान रहे। मैं लोकर्पाण के बाद से ही शांत हूं। फिर भी ताला लगा दिया। पार्क में लिखे विवेकानंद के वाक्य पढक़र ही कांग्रेस वाले कुछ सीख लेते, लेकिन वह अनावश्यक छवि खराब की जा रही है।
विश्वास सारंग, विधायक, नरेला
पार्क का विधिवत लोकार्पण कर दिया। विधायक, पार्षद को निमंत्रण दिया, लेकिन वे पहुंचे नहीं। सुरक्षा की दृष्ठि से वहां पुलिस तैनात की गई। कुछ दिन पहले पार्क में तोड़-फोड़ की गई थी, दोबारा कोई शासकीय संपत्ति को नुकसान नहीं पहुंचाए इसलिए सुरक्षा बढ़ाई गई है। पार्क जनता को सौंप दिया गया है। जनता ही इसकी सुरक्षा करें, एेसी उम्मीद है।
कैलाश मिश्रा, जिला अध्यक्ष कांग्रेस
क्या कह रहे रहवासी
दोनों पार्टियों ने अपनी-अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है। इसे जबरन तुल दिया जा रहा है। जनता के पैसे से पार्क निर्माण हुआ हैं इसे जनता के लिए खोल दिया जाना चाहिए।
ज्ञानेद्र दुबे, रहवासी, अशोका गार्डन
लोकार्पण के बाद पुलिस से एेसा लगा रहा यह वाघा बॉर्डर है। पार्क को लेकर इतनी सुरक्षा पहली बार देखी। लोकार्पण के बाद खोल दिया जाना चाहिए, लेकिन यहां सुरक्षा तैनात कर दी गई।
शुभांशु खत्री, रहवासी
पुलिस को देखकर बच्चे डर रहे हैं। पूछते हैं कि पार्क शुरु हो गया तो पुलिस क्यों आई। यह अच्छा होता कि किसी स्थानीय सम्मानित नागरिक से इसका लोकार्पण करवा दिया जाता।
फरहान अहमद, रहवासी
Published on:
09 Mar 2019 10:41 am
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