
भोपाल। खुशबुओं की बात करें तो इत्र का नाम सबसे पहले आता है। छोटी-छोटी शीशियों में बंद इन खुशबुओं की राजधानी में जमकर डिमांड है। इनमें कुछ सस्ते हैं तो किसी की कीमत पचास हजार रुपए तक है। इन तीस दिनों में करीब दस करोड़ का कारोबार होता है। माहे रमजान में इत्र का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। धार्मिक नजरिए से खुशबू को लगाना सुन्नत है। ऐसे में इसका इस्तेमाल अभी ज्यादा है। नए पीढ़ी भी परफ्यूम के साथ ही इसे पसंद कर रही है।
80 साल पहले कन्नौज से आए थे
1930 में इब्राहिमपुरा में सबसे पहली दुकान है। इसका संचालन करने वाले रफीक अहमद ने बताया कि तीन पीढिय़ों से काम कर रहे हैं। इन्होंने बताया कि दादा हाजी इनायतउल्ला खान 1930 में कन्नौज से भोपाल आए थे।
तब उन्होंने जुमेराती गेट के पास भोपाल में इत्र की सबसे पहली दुकान खोली थी। इनके बाद पिता हाजी मोहम्मद युनूस ने संभाला। अब वे काम देख रहे हैं।
ये हैं वैराइटी: गुलाब, बेला, मोगरा, जासमीन, हिना, रातरानी, मोतिया, फिरदौस, फुशुआ जैसा इत्र छोटी-छोटी शीशियों में आता है।
सोने की तरह तोले में माप, पचास हजार तक कीमत
धार्मिक महत्व भी है
खुशबू लगाने का धार्मिक महत्व भी है। उलेमा ने बताया कि इत्र लगाना सुन्नत है। इसी के चलते इस माह में इसकी डिमांड बढ़ जाती है। हाफिज जुनैद ने बताया कि कई परफ्यूम में अल्कोहल होता है। ऐसे में इसे लगाने से कुछ लोग परहेज करते हैं।
पंद्रह दिनों तक महक
इत्र कई वैराइटी में आता है। इनमें ऊध सबसे महंगा इत्र माना जाता है। यह तोला और माशा में बिकता है। बीस ग्राम की कीमत 15 हजार रुपए तक है। मुश्क, प्योर ऊद से आदि से निर्मित इत्र 15 दिन तक महकती रहती है।
Published on:
08 Apr 2023 03:59 am
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