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Polio awareness week: पोलियो मुक्त की दिशा में एक कदम ओर, बच्चों को दी गई दो बूंद जिंदगी की

पोलियो मुक्त की दिशा में एक कदम और, बच्चों को दी गई दो बूंद जिंदगी की

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Polio awareness week: पोलियो मुक्त की दिशा में एक कदम ओर, बच्चों को दी गई दो बूंद जिंदगी की

भोपाल। पोलियो एक गंभीर बीमारी है। जो बहुत तेजी से इंसान के शरीर में फैलकर उसकी मसल्स को कमजोर कर देती है। इसलिए देश से पोलियो को जड़ से खत्म करने के लिए पोलियो सप्ताह मनाया जा रहा हैै। देश को पोलियों मुक्त करने के लिए हर साल 6 अगस्त से 12 अगस्त तक पोलियों सप्ताह मनाया जाता है। ताकि देश को पोालियो मुक्त किया जा सके। आपको बता दें कि देश से पोलियो को खत्म करने के लिए 1995 में पोलियो जागरूकता अभियान की शुरूआत की गई थी। जिसके चलते विश्व स्वास्थ संगठन ने 2011 में भारत को पल्स पोलिस से मुक्त बताया। उसके बाद लगातार प्रयास किया जा रहा है कि भारत में फिर कोई पोलियो पीड़ित न मिले।

इस अभियान के तहत 0 से 5 साल तक के बच्चों को पोलियो की दवा पिलाई जाती है। ताकि बच्चों को पोलियो वैक्सीन देकर, पोलियों वायरस से बचाया जा सके। हर साल इस अभियान के तहत लोगों को जागरूक करने का काम किया जाता है। जिससे वे अपने बच्चों को समय समय पर पोलियों की दो बूंद जरूर पिलाएं। साथ ही पोलियो जैसी बिमारी से संबंधित जानकारी भी दी जाती है।

कैसे हुई पोलियो दिवस की शुरूआत
बताया जाता है कि करीब एक दशक पहले रोटरी इंटरनेशनल ने जोनास साल्क के जन्म के अवसर पर पोलियो दिवस शुरू किया था, जिन्होंने पोलियोमाइलाइटिस के खिलाफ़ टीका विकसित किया।
निष्क्रिय पोलियोवायरस वैक्सीन और लाइव मौखिक पोलियोवायरस वैक्सीन का उपयोग करने के लिए वर्ष 1988 में ग्लोबल पोलियो उन्मूलन पहल (जीपीईआई) की स्थापना की गई। यह सार्वजनिक-निजी साझेदारी है, जिसमें रोटरी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ), रोग नियंत्रण और रोकथाम के लिए यू.एस. केंद्र, यूनिसेफ, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन और अन्य देशों की सरकारें शामिल हैं।

6 वर्षो से नहीं मिला पोलियो का नया केस
2011 के बाद यानि की पोलियो के आखिरी मामले की रिपोर्ट के बाद से 2017 तक देश में एक भी पोलियो का मामला दर्ज नहीं हुआ। इसके पहले जब देश पोलियो पीड़ित था। उस समय लगता था कि देश पोलियों से मुक्त नहीं हो पाएगा। पर, 2011 के बाद एक भी नया केस पोलियों का न मिलना, अपने आप में मील का पत्थर साबित हुआ। जो कि मज़बूत निगरानी प्रणाली, गहन टीकाकरण अभियान और लक्षित सामाजिक गतिशीलता प्रयासों के महत्व को दर्शाता है। लेकिन जब तक यह रोग जड़ से खत्म नहीं हो जाता, तब तक हमें सतर्क रहना चाहिए। साथ ही देश को पोलियो मुक्त बनाने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए।

कैसे रोका जाए पोलियो को
डॉक्टर दिनेश चौधरी ने बताया कि पोलियो को रोकने का कोई ठोस उपचार नहीं है। पोलियो के टीके की सहायता से ही पोलियो पर जीत हासिल की जा सकती है। क्योंकि पोलियो एक लाइलाज बीमारी है। इसके वायरस पूरी बॉडी में बहुत तेजी से फैलते हैं और मसल्स को कमजोर कर देते हैं। इसलिए हर साल जगह जगह पर कैंप लगाकर पोलियो वैक्सीन दिया जाता है। ताकि बच्चे का जीवन सुरक्षित रहे। इस संक्रमण रोकने के लिए दो प्रकार के टीकें हैं।
ओपीवी (ओरल पोलियो वैक्सीन) संस्थागत प्रसव के दौरान इसे जन्म के समय मुख से दिया जाता है, फिर प्राथमिक तीन खुराकों को छह, दस और चौदह सप्ताह और एक बूस्टर खुराक सौलह से चौबीस महीने की आयु में दी जाती है। इंजेक्टेबल पोलियो वैक्सीन (आईपीवी) इसे डीपीटी की तीसरी खुराक के साथ-साथ सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत अतिरिक्त खुराक के रूप में दिया जाता है।

शहर में कई जगह लगे हैं कैंप
भोपाल शहर और आस पास की जगहों पर पोलियो कैंप लगाए गए है। आगंनवाडी कार्यकर्ताओं द्वारा जगह जगह जाकर 0 से 5 साल तक के बच्चों को पोलियों की दवाई दी जा रही है। ताकि यह दो बूंद उनकी जिंदगी बचा सके।