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पाषाण काल के लाखों वर्ष पुराने हथियारों की करते हैं पूजा-अर्चना

डॉ. व्यास के पास संग्रहीत हैं पत्थर के औजार  

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rawan dahan

पाषाण काल के लाखों वर्ष पुराने हथियारों की करते हैं पूजा-अर्चना

भोपाल. पुरातत्वविद् डॉ. नारायण व्यास के पास पाषाण काल के लाखों वर्ष पुराने हथियार हैं। वे वर्षों से इन हथियारों की पूजा करते आ रहे हैं। ये वो औजार हैं, जिनका उपयोग आदि मानव द्वारा किया जाता था। ये हथियार आदि मानव के जीवन यापन व रक्षा के लिए थे। आजकल लोग बंदूक, तलवार आदि अस्त्र-शस्त्रों का प्रयोग शान और वर्चस्व का प्रदर्शन करने के लिए करते हैं।

शादी समारोह या अन्य अवसरों पर हर्ष फायरिंग तो एक चलन सा बन गया है, जिसके चलते कई हादसे हो चुके हैं। ऐसे हादसों में खुशी का अवसर मातम के माहौल में बदल जाता है। विजयदशमी के दिन परम्परागत रूप से भी कई संगठन व सामाजिक लोग अस्त्र-शस्त्रों का पूजन करते हैं।

डॉ. नारायण व्यास के पास लाखों वर्ष पुराने पत्थर के भाले, कुल्हाड़ी, स्क्रैपर्स, वसूला, तीर के अग्र भाग, इत्यादि संग्रहीत हैं। पाषाण युग के हथियार हमारी संस्कृति की पहली सीढ़ी हैं। भोपाल और इसके आसपास के पाषाण युग के तमाम साक्ष्य हैं।

यह क्षेत्र मानव सभ्यता के विकास का महत्वपूर्ण केन्द्र रहा है। इसलिए यहां पुरातात्विक, ऐतिहासिक व धार्मिक धरोहरों का खजाना भरा है। कुछ समय पूर्व उन्हें कोलार क्षेत्र से एक पत्थर का औजार मिला था, जो लगभग 17 लाख वर्ष पुराना माना गया था।


बच्चों को कर रहे शिक्षित
डॉ. व्यास भोपाल के कई संस्थानों के अलावा ग्रामीण क्षेत्र के स्कूली बच्चों, शिक्षकों व संभ्रान्त नागरिकों को इन हथियारों की जानकारी दे रहे हैं। वे अभी तक कई स्कूलों के सैकड़ों बच्चों व स्टाफ को इस तरह की जानकारी दे चुके हैं।

डॉ. व्यास अपने साथ प्रीहिस्टोरिक टूल्स, पॉटरी, कॉइन्स, फॉसिल्स आदि ले जाते हैं और बच्चों, शिक्षकों व लोगों को इनके बारे में बताते हैं। उनका कहना है कि बच्चे सबसे अधिक इन हथियारों के बारे में पूछते हैं कि आदि मानव इनका उपयोग किस तरह करता था।