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खुंखार अपराधियों की सजा माफ, विशेषाधिकार पर मनमानी कहीं लगा न दे सुरक्षा में सेंध

मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर प्रदेश की जेलों में बंद करीब 36 हजार बंदियों में से 11 हजार को दो महीने की विशेष सजा माफी दी गई

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भोपाल। मध्यप्रदेश स्थापना दिवस पर प्रदेश की जेलों में बंद करीब 36 हजार बंदियों में से 11 हजार को दो महीने की विशेष सजा माफी दी गई। इनमें हत्या के मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रहे बंदी भी शामिल हैं। सजा माफी की पूरी प्रक्रिया महज 12 दिन में पूरी की गई।

जेल मैन्युअल के हिसाब से बंदियों को विशेष सजा माफी देने के लिए कोई विशेष कारण होना जरूरी है, लेकिन बंदियों को महज अच्छे चाल-चलन का आधार बताकर माफी मिली है। खास बात यह भी कि सजा माफी की प्रक्रिया १८ अक्टूबर से ३० अक्टूबर के बीच महज १२ दिन में पूरी हो गई। इस दौरान दीपावली की छुट्टियां भी आईं थी।

12 दिन... 5 छुट्टियां...

बंदियों की सजा माफी में यह गड़बड़झाला पहली बार नहीं हुआ है, पिछले एक दशक से यही होता आ रहा है। विशेष कार्य को जेल मुख्यालय ने अपने हिसाब से परिभाषित कर अच्छे चाल-चलन से जोड़ लिया है। इसके साथ ही विशेष माफी तयशुदा समय के बजाय कभी भी दी जा रही है। कमेटी बैठने का समय स्पष्ट तौर पर दिसंबर और जून का आखिरी हफ्ता जेल मैन्युअल में तय है। इससे पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल उठ खड़े हुए हैं।

चार दिन में हो गई छानबीन

दरअसल, जेल महानिदेशक को विशेष सजा माफी का अधिकार है। वह किसी भी कैदी को एक साल में दो माह तक की सजा माफी दे सकते हैं। जेल मैन्युअल में इसकी एक प्रक्रिया है। सजा माफी के लिए 18 अक्टूबर को जेल महानिदेशक की ओर से सभी केंद्रीय जेलों को निर्देश भेजा गया कि स्थापना दिवस पर बंदियों को विशेष सजा माफी दी जानी है। इसके लिए पात्र बंदियों की जानकारी जेल मुख्यालय को भिजवाएं। केंद्रीय जेलों ने यह जानकारी 25 अक्टूबर तक जेल मुख्यालय को भेज दी। मतलब आदेश जारी होने के सात दिन के भीतर। इस दौरान दिवाली और शनिवार-रविवार सहित पांच छुट्टियां भी थीं। केंद्रीय जेलों से जो सूची आई, उसे जेल मुख्यालय में बनाई गई कमेटी ने देखा और उसमें कुछ संशोधन के बाद जेल महानिदेशक को अपनी टीप के साथ भेज दिया। इसके बाद 30 अक्टूबर को आदेश जारी कर सजा माफी दी गई।

नहीं अपनाई यह प्रक्रिया

महानिदेशक जेल से मिलने वाली विशेष सजा माफी के लिए नियम है कि सभी जेलर और जेल अधीक्षक दिसंबर और जून महीने के आखिरी सप्ताह में कमेटी का गठन करेंगे, जो पात्र बंदियों का चयन करेगी। जेलर अपने जेल अधीक्षक को यह सूची देने के साथ हर बंदी के लिए स्पष्ट कारण बताएंगे कि क्यों उसे विशेष सजा माफी के योग्य माना गया है। अधीक्षक सूची को आगे भेजने से पहले खुद अच्छी तरह पड़ताल से करेंगे। इसमें वे ध्यान रखेंगे कि कम से कम नामों को आगे बढ़ाएं, पूरी सूची आगे भेजने की बाध्यता उन पर नहीं है। अधीक्षक से मिली सूचियों के आधार पर ही जेल मुख्यालय में की कमेटी पात्रता देखेगी और संतुष्ट नामों पर विचार कर शेष को लौटा देगी।
नहीं बताया, क्यों दे रहे माफी?


प्रदेश भर से करीब साढ़े 11 हजार नाम पुलिस मुख्यालय को जेल अधीक्षकों ने भेजे। कमेटी ने इन नामों पर विचार करने के बाद दुराचार और एनडीपीएस एक्ट के मामलों को लौटा दिया। इसके बाद करीब 11 हजार नामों को विशेष सजा माफी की मंजूरी दी। जेल अधीक्षकों ने जो सूची भेजी, उसमें कैदियों के विशेष काम के कॉलम में सिर्फ उनके कार्यों का उल्लेख है। नियमों के हिसाब से विशेष सजा माफी के लिए काम की विशिष्टता का उल्लेख जरूरी है।

* हमने नियमों का पालन किया। कमेटी ने जिन बंदियों को पात्र पाया उन्हें ही माफी दी गई।
- संजय चौधरी, महानिदेशक जेल