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सरकारी भवनों की छतों पर निजी कंपनियां लगाएंगी सोलर प्लांट, दफ्तरों को मिलेगी सस्ती बिजली

दो-तीन रुपए प्रति यूनिट मिल सकेगी बिजली, रेस्को मॉडल में सरकारी दफ्तरों का निवेश होगा शून्य

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Private companies will install solar plants on the roofs of government

Private companies will install solar plants on the roofs of government

भोपाल @ अशोक गौतम. सरकारी दफ्तरों को अब सस्ती दरों पर सोलर बिजली मिलेगी। इसके लिए इन दफ्तरों की छत पर निजी कंपनियां बिना किसी सरकारी अनुदान के सोलर प्लांट लगाएगी और प्लांट की जगह के बदले २५ साल तक सस्ते में उन्हें बिजली देगी। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम रेस्को मॉडल के तहत यह नया प्रयोग शुरू करने जा रहा है।
निगम पूरे प्रदेश के हर जिले जिला मुख्यालय पर बने शासकीय भवनों की जानकारी तैयार कर रहा है। इसका डाटा तैयार करने से यह पता लगाया जा सकेगा कि सरकारी भवनों की छतों का कुल एरिया कितना है। एरिया तय होने के बाद शसकीय भवनों की छतों के अनुसार सोलर पेनल लगाने के लिए प्रदेश स्तर पर टेंडर जारी किए जाएंगे। टेंडर में जो सबसे सस्ते दर पर बिजली शासकीय कार्यालयों को उपलब्ध कराएंगी उस कंपनी को सोलर पैनल लगाने का काम दिया जाएगा।
निगम का अनुमान है कि निजी कंपनियां 2 से 3 रुपए प्रति यूनिट पर सरकारी दफ्तरों को बिजली उपलब्ध कराएंगी। प्रत्येक सरकारी कार्यालय का जिला स्तर पर बिजली कंपनियों से अनुबंध किया जाएगा। वे पैनल लगाने के साथ ही कनेक्शन देने के लिए मीटर भी लगाएंगी। विद्युत वितरण कंपनी की तर्ज पर ही सोलर पैनल लगाने वाली कंपनियों बिजली बिल की हर माह वसूली करेगी।

भवनों में होंगे दो पावर ग्रिड
शासकीय भवनों में दो पावर ग्रिड लगाए जाएंगे। सोलर लाइट से आपूर्ति के अलावा अगर और बिजली की जरूरत कार्यालयों को पड़ती है तो वे विद्युत वितरण कंपनी के कनेक्शन से ले सकेंगे। सोलर पैनल लगाने वाली कंपनियां 25 साल तक बिजली बिल वसूली के अलावा उसके रख-रखाव का भी काम करेगी। इसके बाद नए सिरे से दोबारा टेंडर जारी किए जाएंगे, क्योंकि सोलर पैनल की आयु इससे अधिक नहीं होती है।

जिला स्तर पर होगा समूह
सोलर लाइट लगाने के लिए कंपनियां जिला स्तर पर एक समूह बनाएंगी। पूरे जिले के शासकीय भवनों में लाइट लगाने का काम एक ही कंपनी को दिया जाएगा। इस व्यवस्था से सोलर प्लांट लगाने की निविदा में बड़ी-बड़ी कंपनियां ही हिस्सा ले सकेंगी। बड़ी कंपनियां बेहतर ढंग से काम करने के साथ ही अच्छे ढंग से रख-रखाव भी करेंगी। कंपनियां अपना टोल फ्री नम्बर भी जारी करेगी जिससे किसी तरह से गड़बड़ी होने पर शिकायत दर्ज कराई जा सके।

मात्र दस फीसदी शासकीय भवनों में सोलर लाइट
वर्तमान में प्रदेश के मात्र दस फीसदी शासकीय भवनों में सोलर टाइट लगाई गई है। इन भवनों में सोलर लाइट सरकार की अनुदान राशि पर लगाई गई है, इसके लिए सरकार ने 45 प्रतिशत अनुदान दिया है। सरकार ने अब घरों की छत पर सोलर लाइट लगाने के लिए अनुदान देना पूरी तरह से बंद कर दिय है। अब बिना किसी अनुदान के कंपनियों से शून्य निवेश पर रेस्को मॉडल से सोलर लाइट लगाने के योजना तैयार की गई है।

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