8 फ़रवरी 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

आवासीय विद्यालयों की सीटे फुल करने आदिवासी स्कूल के बच्चों का तैयार होगा प्रोफाइल

- आवासी विद्यालयों के प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी बच्चे नहीं लेते हैं हिस्सा

2 min read
Google source verification

भोपाल

image

Ashok Gautam

Dec 22, 2019

आवासीय विद्यालयों की सीटे फुल करने आदिवासी स्कूल के बच्चों का तैयार होगा प्रोफाइल

आवासीय विद्यालयों की सीटे फुल करने आदिवासी स्कूल के बच्चों का तैयार होगा प्रोफाइल

भोपाल। आवासीय विद्यालयों के प्रवेश परीक्षा में 50 फीसदी बच्चे हिस्सा नहीं लेते हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग सभी बच्चों को प्रवेश परीक्षा में शामिल करने का प्रयास कर रहा है। इसके लिए प्राचार्यों और प्रधानाध्यापकों से स्कूल में पढऩे वाले बच्चों की प्रोफाइल आईडी तैयार करा रहा है। इसमें बच्चों के अभिभावकों के मोबाइल नम्बर भी जोड़े जाएंगे।

आदिम जाति कल्याण विभाग विशिष्ट आवासीय विद्यालय और एकलव्य आदर्श विद्यालय शहरी क्षेत्रों में संचालित हैं। इन विद्यालयों में प्रवेश देने के लिए प्रवेश परीक्षाएं कराई जाती हैं, लेकिन इस परीक्षा में ज्यादा छात्र-छात्राएं शामिल नहीं होते हैं। आदिम जाति कल्याण विभाग इस वर्ष से सौ प्रतिशत छात्र-छात्राओं को प्रवेश परीक्षा में शामिल करने का प्रयास कर रहा है।

इसके लिए सभी स्कूलों को कहा कि वे कक्षा 5वीं, 8वीं के सभी छात्र-छात्राओं की प्रोफाइल आइडी तैयार करें। इस प्रोफाइल को विभाग के पोर्टल पर अपलोड करें। प्रवेश परीक्षा के दौरान इन छात्रों का प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित करें। उनके अभिभावकों के मोबाइल नम्बर प्रवेश परीक्षा की सूचना दें और मैसेज करें।

प्रवेश परीक्षा के संबंध में सभी सकूलों और गांवों में जागरुकता कार्यक्रम भी करें। आश्रम विद्यालयों में पढऩे प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के छात्र-छात्राओं को आवासी विद्यालयों के संबंध में जानकारी दें।

जिससे आवासीय विद्यालयों में प्रवेश की प्रतियोगिता बढऩे के साथ ही योग्य विद्यार्थियों का चयन हो सके और इन विद्यालयों की सभी सीटें भी फुल हो जाएं, क्योंकि 30 फीसदी सीटे खाली रह जाती हैं। विभाग ने आवासी विद्यालयों से 6वीं और 9वीं कक्षा की खाली सीटें की जानकारी मांगी है।

वहीं आदिम जाति कल्याण विभाग ने सभी प्राचार्यों से कहा है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों का स्कूल में प्रवेश कराने के लिए अलग-अलग तरह के प्रयास करें। स्कूल चले अभियान भी चलाएं। इससे अभिभावकों को भी शामिल करें। पालक शिक्षक संघ में माध्यम से गांव गांव में अभियान चलाएं, जिससे सौ प्रतिशत बच्चों का स्कूलों में प्रवेश हो सके।