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बच्चों को देख पसीजा रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल का दिल, सुनाया अनोखा फैसला

ट्रेन से गिरकर हो गई  थी पिता की मौत, क्लेम किसे दिया जाए इसे लेकर था संशय

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Anwar Khan

Apr 28, 2016

railway claim tribunal

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विकास वर्मा @ भोपाल। रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल (आरसीटी) में मुआवजे से जुड़े एक मामले में फैसला आने से पहले ही आवेदकों की मौत हो गई। परिवार में सिर्फ चार और छह साल के मासूम भाई-बहन बचे। दोनों बच्चे फिलहाल अपने चाचा के संरक्षण में हैं।

क्लेम किसे मिले, यह संशय था, लेकिन इस मामले में आरसीटी के ज्यूडीशियल मेंबर मदन मोहन पारिख व टैक्निकल मेंबर रश्मि कपूर की बेंच ने मानवीय पहलू को देखते हुए सीपीसी की धारा-151 के आधार पर फैसला सुनाया। फैसले में रेलवे को आदेश दिया गया है कि दोनों बच्चों को दो-दो लाख रुपए बतौर मुआवजा और 10 प्रतिशत की दर से 4 साल का ब्याज चुकाया जाए। यह राशि बच्चों के नाम अकाउंट में फिक्स डिपॉजिट कराई जाएगी, जिसे कि बालिग होने पर ही बच्चे निकाल सकेंगे।

चलती ट्रेन से गिर गया था रामकुमार
29 वर्षीय रामकुमार वर्मा 26 अक्टूबर 2009 को जबलपुर के मदनमहल स्टेशन से पिपरिया आ रहा था। इस दौरान बांसखेड़ा गेट के पास धक्का लगने से वह ट्रेन से गिर गया था। गंभीर चोट लगने से रामकुमार की मौत हो गई। इसके बाद 18 जनवरी 2010 को रामकुमार की पत्नी व माता-पिता ने रेलवे क्लेम ट्रिब्यूनल एक्ट-1987 के सेक्शन-16 के तहत रेलवे से क्षतिपूर्ति का दावा पेश किया।

फैसले से पहले ही तीनों आवेदकों की मौत
रामकुमार की पत्नी, मां और पिता ने रेलवे से मुआवजे के लिए यह केस दायर किया था, लेकिन फैसले से पहले अक्टूबर 2015 में तीनों आवेदकों का निधन हो गया। अब रामकुमार के परिवार में सिर्फ पांच साल की बेटी खुशी और चार साल का बेटा रोहन ही बचा। जोकि वर्तमान में अपने चाचा रमेश वर्मा के संरक्षण में रह रहे हैं। यह बात जब ट्रिब्यूनल के सामने आई तो ज्यूडिशियल मेंबर ने मामले की गंभीरता और मानवीय पहलू के आधार पर यह फैसला सुनाया।

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