
raksha bandhan shubh muhurat
प. डब्बावाला कहते हैं कि रात्रि नौ बजकर सात मिनट पर भद्रा समाप्त हो जाएगी। इसके बाद रक्षाबंधन का पर्व मनाना शास्त्रोचित रहेगा। विधि-विधान से सकारात्मक भाव से श्रद्धा रखते हुए रक्षासूत्र वेष्टित करना चाहिए। सकारात्मक भाव, ऊर्जा तथा शांति-सुख समृद्धि दीर्घायु और उन्नति-पदोन्नति प्रदान करता है।
पं. अमर डब्बा वाला ने बताया कि धर्मशास्त्र में दिवस कालीन पूर्णिमा पर ही रक्षाबंधन मनाने की मान्यता है। इस दृष्टि से सुबह (भद्रा होने के कारण) रक्षाबंधन दिन में नहीं मनाया जा सकेगा। पंचांग की गणना के अनुसार द्वितीय शुद्ध श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर 30 अगस्त को रक्षाबंधन का पर्व है। धनिष्ठा उपरांत शततारका नक्षत्र, अतिगंड योग, सुकर्मा करण के साथ कुंभ राशि के चंद्रमा की साक्षी में रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इस बार भद्रा का वास भूलोक पर होने से दिवसकालीन भद्रा के प्रभाव के कारण रक्षाबंधन रात्रि में मनेगा।
दिनभर रहेगी भद्रा
डब्बावाला ने बताया कि पंचांग अनुक्रम से देखें तो रक्षाबंधन के पर्व काल पर सुबह 10 बजे से भद्रा का आरंभ होगा जो रात्रि में 9:07 तक रहेगा। दिनभर भद्रा का साया रहने के कारण रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जा सकता, क्योंकि ऐसी मान्यता है कि रक्षाबंधन के पर्व काल में पूर्णिमा तिथि की दिवस साक्षी होना आवश्यक है और यदि ऐसी स्थिति में भद्रा का योग बनता हो तो भद्रा का वह काल छोड़ देना चाहिए। भद्रा समाप्त होने के बाद ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाना चाहिए।
इस बार 21 अगस्त को सोमवार के दिन नागपंचमी है। इस दिन चित्रा नक्षत्र शुभ योग, बव करण व कन्या राशि के चंद्रमा की साक्षी होने से पर्व खास रहेगा। पं. अमर डब्बावाला ने बताया कि इस दिन ग्रहों में शुक्र का बाल्यत्व समाप्त होगा, वही बुध वक्री होंगे। इस दिन कुल परंपरा के अनुसार नाग देवता की पूजन की मान्यता है। रक्षाबंधन के साथ ही कई तीज-त्योहार भी अगस्त में आएंगे। 1 अगस्त से 31 अगस्त तक विभिन्न पर्व काल तथा योग संयोग का अनुक्रम बन रहा है। इसमें अलग-अलग प्रकार के व्रत-त्योहार आ रहे हैं।
Published on:
02 Aug 2023 03:50 pm

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