
मध्यप्रदेश में बसने के लिए शहर चुनने की बात आती है तो कुछ ही शहर है जो लोगों को आकर्षित करते हैं। इनमें सबसे पहले नंबर पर है मिनी बॉम्बे इंदौर। इंदौर शहर बाकी शहरों पर भारी पड़ता नजर आता है। रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) के आंकड़े तो यही बताते हैं। इंदौर में रियल एस्टेट परियोजनाओं की संख्या भोपाल की तुलना में लगभग दोगुनी है। जबकि मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल पसंदीदा स्थान मानने के कॉन्सेप्ट के उलट गया है।
भोपाल ही नहीं प्रदेश के अन्य शहर जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन इस मामले में काफी पीछे हैं। एमपी की कमर्शियल राजधानी इंदौर में राजधानी भोपाल की तुलना में रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की संख्या दोगुनी है। भोपाल में 750 के मुकाबले इंदौर में 1,334 प्रोजेक्ट्स रजिस्टर हैं। इन आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि लोगों की सर्वोच्च प्राथमिकता स्वच्छता ही है। इंदौर को पिछले महीने लगातार 7वीं बार देश के सबसे स्वच्छ शहर का पुरस्कार मिला।
प्रदेश में जब भी रियल एस्टेट विकास की बात आती है तो भोपाल और इंदौर शीर्ष दो शहर हैं। राज्य में लगभग 50% रियल एस्टेट परियोजनाएं शामिल हैं। अन्य मुख्य शहरों में रियल एस्टेट परियोजनाओं की संख्या के अनुसान जबलपुर - 288, उज्जैन - 166 और ग्वालियर - 118 परियोजनाएं शामिल हैं। कुल संख्या 5,904 पंजीकृत रियल एस्टेट परियोजनाओं एमपी में है।
पिछले कुछ सालों में, राज्य में रियल एस्टेट सेक्टर में वृद्धि हुई है, जैसा कि रेरा के आंकड़े दिखा रहे हैं। 1 मई, 2017 को राज्य में RERA लागू हुआ था। 2017-18 में, लगभग 1,700 परियोजनाएं पंजीकृत हुईं, और अब यह संख्या 6,000 के करीब है।
रीयल स्टेट से जुड़े लोग बताते हैं कि नोटबंदी और कोविड-19 के कारण कुछ सालों बाद इस क्षेत्र में बिक्री में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है। लेकिन, रेरा के साथ पंजीकृत परियोजनाओं की संख्या इस क्षेत्र के विकास का एकमात्र मापदंड नहीं थी। RERA के आने के बाद परियोजनाएं चरणों में लॉन्च की गईं और नए प्रोजेक्ट्स में नए चरण शामिल हुए हैं।
Published on:
26 Feb 2024 02:02 pm
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