
केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया युद्धग्रस्त क्षेत्र में फंसे भारतीय छात्रों को निकालने में मदद कर रहे हैं।
भोपाल. युक्रेन-रूस युद्ध (russia ukraine war) में फंसे भारतीय मेडिकल छात्रों के युद्धग्रस्त शहरों से निकालने का रास्ता साफ होने लगा है। यूक्रेन वॉर में फंसे मध्यप्रदेश के 225 नागरिक अभी तक वापस लौट आए हैं। इनमें कई छात्र भी शामिल हैं।
यूक्रेन से लौटे मध्यप्रदेश के 225 नागरिक
अभी तक मध्यप्रदेश सरकार को प्रदेश के 452 नागरिक यूक्रेन में होने की जानकारी मिली थी। केंद्रीय विदेश मंत्रालय ने मध्यप्रदेश सरकार को इन नागरिकों की सूचना दी है। इसमें 452 में से 225 नागरिक गुरुवार तक वापस आ चुके हैं। बचे हुए नागरिकों को लाने के लिए मध्यप्रदेश सरकार केंद्र सरकार से सम्पर्क में है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया (jyotiraditya scindia) के पास भी मध्यप्रदेश के नागरिकों की सूची है। सिंधिया विदेश से यात्रियों को लाने के लिए दल में गए हैं। इसके तहत प्रदेश सरकार लगातार सम्पर्क में है।
सरकार के ऑपरेशन गंगा के तहत भोपाल की दो बहनें अपने घर पहुंच गईं हैं। मिली तिवारी और मुस्कान तिवारी साल 2017 में एमबीबीएस की पढ़ाई करने यूक्रेन गई थीं। मिली और मुस्कान ने बताया कि यूक्रेन में अगर कोई इंडिया का तिरंगा लेकर निकलता है तो कोई इस माहौल में भी कोई कुछ नहीं कहता। भारतीय छात्र ही नहीं बल्कि गैर मुल्कों के छात्र भी हाथ में तिरंगा लेकर सुरक्षित स्थानों तक पहुंच रहे हैं।
15 किलोमीटर पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुंची
उधर, यूक्रेन के खारकीव (kharkiv) शहर में फंसी भोपाल की शिवानी, सुची सहित अलग-अलग शहरों और राज्यों के छात्रों को खारकीव (kharkiv) छोड़ने की चेतावनी मिली तो वे दिल्ली स्थित केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा निर्देशन में हंगरी (hungary) पहुंच गए हैं। शिवानी की चाची पुष्पा सिंह ने बताया कि बुधवार दोपहर शिवानी से बात हुई तो उसने बताया कि वे लोग खारकीव शहर छोड़कर करीब 15 घंटे तक पैदल ही चले। मेट्रो पकड़ी और 24 घंटे खड़े होकर सफर करने के बाद 1640 किमी दूर हंगरी तक पहुंचे। अब यहां से अगला निर्देश मिलने के बाद आगे की यात्रा शुरू होगी।
पुष्पा सिंह ने बताया कि यहां से गृह विभाग और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के कार्यालय से जुड़े अधिकारी लगातार हमसे सम्पर्क बनाए हुए हैं। उनके पास जो लास्ट अपडेट है, उसमें सभी बच्चे हंगरी के एक गेस्ट हाउस में रुका होना बताया है। उनको खाना मिल गया है, लेकिन पैदल चलने और 24 घंटे खड़े होकर सफर करने से उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई है। उन्होंने बताया कि अवधपुरी में परिजन बेसब्री से उनके आने का इंतजार कर रहे हैं।
नीलबड़ का आत्रेय श्रीवास्तव रोमानिया पहुंचा
नीलबड़ के हरि नगर में रहने वाला छात्र आत्रेय श्रीवास्तव भी रोमानिया पहुंच गया है। परिजन सविता श्रीवास्तव ने बताया कि आत्रेय अपने आप सम्पर्क करता है। वे लोग यहां से उसे सम्पर्क नहीं कर पा रहे हैं। रोमानिया से कई और छात्र भारत के लिए आएंगे। उसमें आत्रेय भी साथ में आएगा।
यूक्रेन से घर पहुंचा उबैद, पिता से गले मिला, बहन को दुलारा, पिता बोले अब आया सुकून
यूक्रेन में फंसे बुरहानपुर के उबैद पिता समीर खान सात दिन बाद बुरहानपुर लौट आया। घर आते ही अपने परिजनों से गले लग गया। पिता ने कहा अब सुकून आया। घर में खुशी का माहौल हो गया। आसपास के लोग भी उबैद का स्वागत करने पहुंचे। उबैद पांच माह पहले ही बुरहानपुर से यूक्रेन पढ़ाई के लिए गया था। यहां उसकी एमबीबीएस के चौथे वर्ष की पढ़ाई चल रही थी। अचानक 24 फरवरी को रूस का यूक्रेन पर हमला हो गया। उबैद ने पत्रिका से बातचीत में बताया कि हमले वाले दिन मैं पोलटवा में था। इससे 50 किमी की दूरी पर हमले हो रहे थे। मेरे साथ 50 दोस्त ओर साथ थे, इसलिए सभी से हिम्मत थी। उबैद गुरुवार रात 9 बजे बुरहानपुर पहुंचा। जहां परिजनों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उबैद पिता के गले मिला और छोटी बहन आयशा को दुलारा।
Published on:
04 Mar 2022 01:59 am
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