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Heritage Hotel : 125 साल पुरानी इमारत में 22 कमरे- 1 दरबार हॉल के साथ बनेगा 5 स्टार हेरिटेज होटल, ये होगी खासियत

Sadar Manzil: इस मंजिल में भारत के विभिन्‍न राज्‍यों की जनजातीय संस्‍कृति की झलक देखी जा सकती है। मंजिल को दुरुस्त करने के लिए सीमेंट-कंक्रीट की जगह गुड़, मार्बल पाउडर, जूट, मैथी, उड़द दाल आदि का उपयोग किया है...

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Sadar Manzil

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Sadar Manzil Heritage Hotel : सवा सौ साल पुरानी इमारत सदर मंजिल राजधानी का पहला हेरिटेज होटल (Heritage Hotel) होगा। इसमें 22 कमरे और एक दरबार हॉल है। फाइव स्टार सुविधाओं वाले इस होटल में फिनिशिंग का काम अंतिम चरण में है। लोकसभा चुनाव के बाद इसकी शुरुआत होगी। 1898 में नवाब शाहजहां बेगम के बनवाए इस भवन में इंडो वेस्टर्न, यूरोपियन कला का मेल दिखता है।

भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएससीडीसीएल) ने 2017 में रिनोवेशन का कार्य शुरू किया। इसे पुराने रूप में लाने के लिए कई पुरानी फोटो और इतिहास के विशेषज्ञों की मदद ली। राजस्थान के कारीगरों ने नक्काशी को दोबारा उकेरा। तीस साल की लीज पर पीपीपी मोड पर दिया है, जिसमें होटल शुरू होगा।

नवाब शाहजहां बेगम ने 1898 में सदर मंजिल का निर्माण कराया। इसकी डिजाइन दिल्ली के लाल किले के दीवान-ए-खास से मिलती है। नवाबी दौर में यहां दरबार हाल था। रियासत खत्म होने के बाद भोपाल नगर पालिका स्थापित की गई। 5 साल पहले बीएमसी का दफ्तर भी यहां से शिफ्ट हो गया। तब से स्मार्ट सिटी के द्वारा इसका जीर्णोद्धार कराया जा रहा है।

कोलकाता की कंपनी को 30 साल की लीज पर दिया है। इससे स्मार्ट सिटी को राजस्व मिलेगा।- रीतेश शर्मा, नोडल अधिकारी, जिला पुरातत्व पर्यटन काउंसिल

इस प्राचीन इमारत को संवारने का काम पुरातत्व विशेषज्ञों की देखरेख में किया जा रहा है। ताकि इमारत के मूल स्वरूप को कोई नुकसान न पहुंचे। इसके लिए निर्माण कार्य की प्रक्रिया को प्राचीन पद्धति से अंजाम दिया गया है। विशेषज्ञों ने सदर मंजिल को दुरुस्त करने के लिए सीमेंट-कंक्रीट की जगह गुड़, सुरखी, चूना, मार्बल पाउडर, जूट, मैथी, उड़द दाल आदि का उपयोग किया है। इस मंजिल में भारत के विभिन्‍न राज्‍यों की जनजातीय संस्‍कृति की झलक देखी जा सकती है।

यहाँ की वास्तुकला देखने लायक़ है। सदर मंजिल की पच्चीकारी दिल्ली के लाल क़िला स्थित दीवाने ख़ास के अनुरूप है। अनेक ब्रिटिश वायसराय और देश की स्वतंत्रता के बाद महत्त्वपूर्ण राज नेताओं का यहां आगमन होता रहा है।

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