
कोर्ट ने कहा- राज्य सरकारें चाहें तो दे सकती हैं प्रमोशन पर आरक्षण, अब क्या करेंगे चुनावी राज्य
भोपाल/नई दिल्ली. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा, प्रमोशन में आरक्षण जरूरी नहीं है। मध्य प्रदेश के साथ-साथ उससे जुड़े राज्यों छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी विधानसभा चुनाव होने से ऐसे में इस फैसले का राजनीति में बड़ा फर्क भी पड़ सकता है। हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि अगर राज्य सरकारें चाहें को प्रमोशन पर आरक्षण दे सकती हैं। इसके लिए उन्हें कोई आंकड़ा जुटाने की अनिवार्यता नहीं हैं। अब देखना होगा क्या चुनावी राज्यों में प्रमोशन पर आरक्षण की व्यवस्था लागू की जाती है या फिर नहीं।
कोर्ट ने फैसले में सीधे तौर पर प्रमोशन में आरक्षण को खारिज नहीं किया और इस मामले को राज्यों पर छोड़ दिया है। कोर्ट ने कहा कि अगर राज्य सरकारें चाहे तो वे प्रमोशन में आरक्षण दे सकती हैं। सरकार को एससी और एसटी के पिछड़ेपन के आधार पर डेटा जुटाने की जरूरत नहीं है। कोर्ट ने 2006 में दिए गए अपने फैसले पर पुनर्विचार करने से भी इनकार कर दिया है। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा, 2006 में नागराज मामले में दिए गए उस फैसले को सात सदस्यों की पीठ के पास भेजने की जरूरत नहीं है। यह फैसला सही है और इसपर फिर से विचार की जरूरत नहीं है।
सवर्ण कर रहे हैं एसी-एसटी एक्ट का विरोध
एसी-एसटी एक्ट को लेकर देशभर में सवर्ण समाज के लोग विरोध कर रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के नेताओं के खिलाफ प्रदर्शन किए जा रहे हैं और काले झंडे दिखाए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश में इस एक्ट के खिलाफ विरोध तेज हो रहा है। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब चुनावी राज्य प्रमोशन में आरक्षण को लेकर क्या करेंगे यह देखने वाली बात होगी।
असमंजस्य में सरकार
कोर्ट के फैसले के बाद शिवराज सरकार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। हालांकि राज्य सरकार के लोक निर्माण विभाग के मंत्री रामपाल ने कहा, प्रमोशन में आरक्षण मामले में हम न्यायालय का फैसले का सम्मान करते हैं। कुंआ और खाई दोनों को पाटने का काम करेंगे।
Updated on:
26 Sep 2018, 1:08 PM IST
Published on:
26 Sep 2018, 12:00 PM IST
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