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सुप्रीम कोर्ट के मापदंडों पर अब पुलिस करेगी स्कूली वाहनों की जांच

पीएचक्‍यू की पीटीआरआई शाखा ने सभी पुलिस अधीक्षकों को जारी किए निर्देश  

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भोपाल। पुलिस मुख्यालय की पीटीआरआई शाखा ने स्कूल वाहनों को लेकर सख्ती दिखाई है। सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए हैं कि अपने-अपने थाना क्षेत्रों में ही स्कूल वाहनों की गहन चेकिंग की जाए। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का कड़ाई से पालन कराया जाए। पीटीआरआई शाखा के विशेष पुलिस महानिदेशक पुरुषोत्तम कुमार शर्मा ने सर्कुलर जारी कर कहा कि पुलिस वाहन मालिक, वाहन चालक, परिचालक व स्कूल प्रशासन की गलती की वजह से होने वाली स्कूली वाहनों की दुर्घटनाओं का खामियाजा बच्चों व उनके अभिभावकों को भुगतना पड़ता है।

साथ ही जनमानस में पुलिस के प्रति विपरीत छवि बनती है। इसलिए पुलिस पूरी गंभीरता से वाहनों की चेकिंग करे। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि समस्‍त शासकीय एवं अशासकीय स्‍कूलो में निर्देशो का पालन आवश्‍यक रुप से करवाया जाए। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों के परिवहन के दौरान सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं किया जाए। वाहनों की चेकिंग के दौरान बच्चों को किसी प्रकार की असुविधा न हो इसका पूरा ध्यान रखा जाए। यह भी ध्यान रखा जाए कि बस संचालक कार्रवाई से बचने के लिए बच्चों व पालकों को परेशान नहीं करें।

ये हैं सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश

स्कूल वाहनों के आगे व पीछे बड़े अक्षरों में स्कूल बस लिखा हो। बस किराये की हैं तो उस पर आगे एवं पीछे विद्यालयीन सेवा (ऑन स्कूल ड्यूटी) लिखा जावे। विद्यालय के लिए उपयोग में लाई जाने वाली किसी भी बस में निर्धारित सीटों से अधिक संख्या में बच्चे नहीं बैठाएं। प्राथमिक उपचार बॉक्स होना अनिवार्य है। बस की खिड़कियों में आड़ी पट्टियां (हॉरीजेंटल ग्रिल) हो। अग्नशिमन यंत्र हो। स्कूल का नाम एवं टेलीफोन नंबर हो। बस के दरवाजे पर सुरक्षित चटकनी हो।

वाहन चालक को भारी वाहन चलाने का न्यूनतम 5 वर्ष का अनुभव होना चाहिए। वाहन चालक पूर्व में ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का दोषी नहीं ठहराया गया हो। बस में चालक के अलावा एक अन्य योग्य व्यक्ति की व्यवस्था हो। बच्चों के बस्ते रखने के लिए सीटों के नीचे जगह हो। बस में एक व्यक्ति एस्कॉर्ट तथा एक शिक्षक की व्यवस्था हो।