सिंधिया परिवार का कांग्रेस में सफर : जानिये कब-कब जुड़े और कब-कब टूटे

: कांग्रेस में कब आए थे ज्योतिरादित्य सिंधिया jyotiraditya scindia now in BJP
: कब कब कांग्रेस और राजपरिवार के बीच आई खटास
: सिंधिया राजपरिवार शून्य हुई कांग्रेस : indian royal family scindia

भोपाल। देश का जाना माना राजपरिवार scindia royal family अब पूरी तरह से भाजपा के साथ आ गया है। हम बात कर रहे हैं ग्वालियर के राजवंश सिंधिया की... कभी इसी राजवंश indian royal family scindia को अपने साथ लेने के लिए कांग्रेस Congress कई तरह के जत्न करती थी। वहीं आज इस परिवार के वर्तमान में एकमात्र कांग्रेसी ज्योतिरादित्य jyotiraditya scindia सिंधिया ने भी कांग्रेस साथ छोड़कर भाजपा jyotiraditya scindia with BJP का दामन थाम लिया है।

सिंधिया परिवार scindia family की तकरीबन हर पीढ़ी जो राजनीति में आई उसका कहीं न कहीं कांग्रेस congress से जुड़ाव रहा, लेकिन ये भी सच है कि इस राजवंश royal family का हर वो सदस्य जो कभी न कभी कांग्रेस से जुड़ा रहा था, उसने royal family of india नाराजगी के चलते एक न एक बार कांग्रेस अवश्य छोड़ी। फिर चाहे वह राजमाता Rajmata Scindia सिंधिया रही हो, जिन्होंने भाजपा में आने के बाद कभी पीछे मुड़कर कांग्रेस को नहीं देखा, या माधवराव Madhavrao Scindia सिंधिया जिन्होंने 90 के दशक में कांग्रेस छोड़कर नई पार्टी तक का निर्माण कर दिया था, भले ही बाद में वे वापस कांग्रेस congress news में चले गए।

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इसके बाद माधवराव के बेटे jyotiraditya ज्योतिरादित्य scindia ने भी करीब 2 दशक तक कांग्रेस के साथ रहने के बाद कांग्रेस no to congress का साथ छोड़कर आज भाजपा का दामन थाम लिया है।

आजादी के 10 साल बाद सिंधिया परिवार royal family of india की कांग्रेस में हुई थी एंट्री : ऐसे समझें सिंधिया राजघराने scindia an royal family of india का कांग्रेस के साथ सफर...
आजादी के बाद ग्वालियर का जयविलास Jai Vilas Palace महल आजादी के बाद रजवाड़ों royal family scindia की राजनीति का एक प्रमुख केंद्र रहा है। देश के मध्य में स्थित अलग-अलग रियासतों को जोड़कर जब मध्य भारत नाम का एक राज्य बनाया गया तो, ग्वालियर परिवार के मुखिया जिवाजीराव इसकी धुरी थे।

वैसे तो जिवाजीराव jiwaji rao scindia की राजनीति में कोई खास दिलचस्पी नहीं थी, लेकिन ग्वालियर क्षेत्र में सिंधिया परिवार royal family scindia के प्रभाव के कारण कांग्रेस चाहती थी कि जीवाजीराव कांग्रेस में शामिल हो जाएं, जबकि कहा जाता है कि उनका झुकाव दूसरे दल की ओर था। खैर इन सबके जीवाजीराव jiwaji rao तो राजनीति से दूर रहे, लेकिन उनकी पत्नी राजमाता विजयाराजे Vijayaraje Scindia सिंधिया ने काफी मानोमनव्वल के बाद कांग्रेस के टिकट पर 1957 में गुना से लोकसभा Lok Sabha Elections चुनाव लड़ा और जीता। यहीं से सिंधिया परिवार की भारतीय indian politics राजनीति में एंट्री हुई।

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विजयाराजे यानि राजमाता सिंधिया rajmata Vijayaraje Scindia : कांग्रेस से बीजेपी तक का सफर...
राजमाता विजयाराजे को कांग्रेस ने 1962 के आम चुनावों में ग्वालियर royal family scindia से उतारा था। 1957 में गुना से जीत के बाद यहां एक बार फिर से विजयाराजे ने अपने विरोधियों को चारो खाने चित करते हुए जोरदार जीत हासिल की। हालांकि 1967 में मध्यप्रदेश के विधानसभा चुनाव में उन्होंने एक स्वतंत्र प्रत्याशी royal family scindia के तौर पर लड़ा और जीत दर्ज की। मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ तब आया जब विजयाराजे ने 1989 के आम चुनाव में बीजेपी के टिकट पर गुना लोकसभा से चुनाव लड़ा।

कांग्रेस की ओर से लड़े चुनाव:
1957-गुना लोकसभा-कांग्रेस
1962-ग्वालियर लोकसभा-कांग्रेस


माधवराव सिंधिया Madhavrao Scindia and congress और कांग्रेस ...
राजमाता विजयाराजे के कहने पर ही उनके बेटे माधवराव सिंधिया royal family scindia ने भी राजनीति में आए। उन्होंने अपना राजनैतिक कॅरियर 1971 में जनसंघ के टिकट पर गुना से लोकसभा चुनाव लड़ कर शुरू किया। इसके बाद उन्होंने 1977 के आम चुनाव में ग्वालियर लोकसभा सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा और यहां से भी ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

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माधवराव सिंधिया Madhavrao Scindia कांग्रेस में : मां से रिश्तों में आई दरार...

वहीं मोरारजी देसाई की सरकार गिरने के बाद जनवरी 1980 में देश में आम चुनाव का एलान royal family scindia हुआ। इस समय जनता पार्टी ने इंदिरा गांधी के खिलाफ राजमाता विजयाराजे को रायबरेली से चुनाव लड़वाने का एलान किया। इसी वक्त माधवराव royal family scindia के संजय गांधी के साथ रिश्ते बेहतर हो रहे थे, तो उन्होंने अपनी मां से अपना फैसला बदलने के लिए कहा, लेकिन विजयाराजे नहीं मानी और यहीं से मां बेटे के रिश्ते में दरार आ गई। 1980 तक माधवराव ने पूरी तरह से कांग्रेस का दामन थाम लिया।

कांग्रेस की ओर से लड़े चुनाव:
1980-गुना लोकसभा-कांग्रेस
1984-ग्वालियर लोकसभा-कांग्रेस
1989-ग्वालियर लोकसभा-कांग्रेस
1991-ग्वालियर लोकसभा-कांग्रेस

कांग्रेस छोड़ी और फिर वापस आए...
इसके बाद माधवराव सिंधिया Madhavrao Scindia और कांग्रेस congress के रिश्तों Relationships में दरार आ गई, जिसके चलते माधवराव सिंधिया ने मप्र विकास कांग्रेस नाम की एक पार्टी बना ली और वे 1996 का लोकसभा चुनाव ग्वालियर से इसी पार्टी से लड़े, यहां भी उन्हें जीत ही मिली। लेकिन कांग्रेस से रिश्तों की दरार जल्द ही खत्म हो गई और वे फिर कांग्रेस में आ गए।

फिर लड़े कांग्रेस से चुनाव:
1998-ग्वालियर लोकसभा-कांग्रेस
1999-गुना लोकसभा-कांग्रेस

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ज्योतिरादित्य सिंधिया jyotiraditya scindia and congress नाराजगी के बाद लिया साहसिक कदम...
पिता माधवराव की प्लेन क्रैश में अचानक मौत के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया royal family scindia ने पिता के कदमों पर आगे बढ़ते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया। दरअसल 30 सितंबर, 2001 को विमान हादसे में ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया की मौत हो गई। फिर ज्योतिरादित्य राजनीति में आए, 2002 लोकसभा में उन्‍हें सर्वप्रथम चुना गया, 2004 में 14वीं लोकसभा में उन्‍हें दोबारा चुना गया।

सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया royal family scindia को 6 अप्रैल, 2008 को पहली बार मनमोहन सरकार में सूचना एवं प्रसारण राज्यमंत्री बनाया गया जब मनमोहन सिंह दूसरी बार प्रधानमंत्री बने तो सिंधिया को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) बनाया गया। सिंधिया कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बेहद करीबियों में गिने जाते रहे, सिंधिया अक्सर राहुल गांधी के साथ नजर आते थे।

कांग्रेस की ओर से लड़े चुनाव:- royal family scindia
2002-गुना लोकसभा-कांग्रेस (उपचुनाव)
2004-गुना लोकसभा-कांग्रेस
2009-गुना लोकसभा-कांग्रेस
2014-गुना लोकसभा-कांग्रेस
2019-गुना लोकसभा-कांग्रेस (हारे)

इसके मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव 2018 से ज्योतिरादित्य सिंधिया के रिश्ते भी कांग्रेस के साथ खटास भरे होने लगे। जिसके बाद 10 मार्च 2020 को उन्होंने कांग्रेस को अलविदा कह दिया। अब 11 मार्च 2020 की दोपहर करीब 3 बजे उन्होंने भाजपा ज्वाइन कर ली है।

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कांग्रेस में हाहाकार...
सिंधिया के कांग्रेस छोड़ने political drama in mp के साथ ही मध्यप्रदेश में Madhya Pradesh Government Crisis सियासी हलचलें अत्यधिक तेज हो गईं। प्रदेश में जगह जगह से कांग्रेस के मंत्री व कार्यकर्ताओं के साथ ही समर्थक भी कांग्रेस से इस्तीफा दे रहे हैं।इससे पहले मंगलवार को ही दिल्ली स्थित भाजपा कार्यालय में उनकी ज्वाइनिंग की चर्चाएं चल रही थीं। लेकिन इसके बाद उन्होंने बुधवार यानि अगले दिन आज 11 मार्च को भाजपा की सदस्यता ले ली।

दरअसल Jyotiraditya Scindia ज्योतिरादित्य सिंधिया ने पिछले दिनों सुबह अमित शाह के साथ meet with amit shah and pm modi पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, वहीं इसके बाद वे भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा से भी मिले थे।

होली के दिन ही भाजपा में शामिल होने की थी चर्चा...
ज्योतिरादित्य Jyotiraditya Scindia सिंधिया के मंगलवार को ही भाजपा में आने के कयास इसलिए भी लगाए जा रहे थे, क्योंकि एक तो हर ओर उनकी ओर मोदी की मुलाकात का जिक्र चल रहा था, वहीं मंगलवार को वे दिल्ली में ही थे और इसी दिन bjp delhi office भाजपा कार्यालय में पाल्यामेंट्री बोर्ड की बैठक meeting भी थी। लेकिन 7 बजे शुरू होने वाली इस बैठक से करीब 1.30 घंटे पहले ही गृहमंत्री अमित शाह amit shah सहित भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा, राजनाथ सिंह, नितीन गडकरी के अलावा कई बड़े भाजपा sr. leaders of bjp नेता दिल्ली स्थित भाजपा bjp office कार्यालय में पहुंच गए।

जिसके चलते वहां जल्द ही सिंधिया के आने व सदस्यता लेने के कयास लगाए जाने लगे। जबकि शाम करीब 6.15 बजे प्रधानमंत्री pm narendra modi नरेंद्र मोदी भी भाजपा कार्यालय पहुंच गए थे। सिंधिया Scindia के मंगलवार को ही भाजपा से जुड़ने के कयास उस समय गलत सिद्ध हो गए, जब वे शाम 6.55 बजे तक भी भाजपा कार्यालय नहीं पहुंचे।

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दीपेश तिवारी
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