भोपाल

ऑफिस में सीनियर्स करते हैं परेशान, करियर खत्म करने की दे रहे धमकी….

MP News Crime Against Women: आजकल बेटों की तरह घर की दहलीज लांघकर बेटियां देश-विदेश में अपना करियर बनाने निकल पड़ती हैं, मनमुताबिक नौकरी और ऑफिस उन्हें जितना खुश कर देता है, उससे कहीं ज्यादा पीड़ा उन्हें तब मिलती है, जब वे सीनियर्स के गलत व्यवहार और धमकियों का शिकार बनती हैं, पत्रिका रक्षा कवच में पढ़ें कुछ ऐसे ही केस जो बताते हैं अपने घर से दूर करियर की चाह में कितने रोड़े...

2 min read
Feb 17, 2025
MP News Crime Against Women

MP News Crime Against Women: बेटियां भी बेटों की तरह बाहर पढ़ाई करने के लिए जाती हैं। पढ़ाई करने के बाद वह अपनी इच्छा के मुताबिक कार्यालयों का चयन करती हैं, जहां वे घर-परिवार से दूर रहकर अपना कॅरियर बनाती हैं। लेकिन राजधानी भोपाल में भी अभी कई ऑफिस का माहौल महिलाओं के लिए अच्छा नहीं है। यहां उनके साथ अमर्यादित व्यवहार किया जाता है। वे लड़कियां जो शहर में अकेली रह रही हैं, उनके साथ सहानुभूति जताकर तो कभी मदद के बहाने नजदीक आने की कोशिश की जाती है। कुछ कार्यालयों में कामकाजी महिलाओं से बातचीत का निष्कर्ष यही है कि यदि इनके झांसे में आए तो कॅरियर के साथ जीवन भी बर्बाद हो सकता है।

केस- 1

एक युवती ने बताया- मैं छत्तीसगढ़ से भोपाल में मास्टर्स की पढ़ाई करने के लिए आयी थी। अंतिम सेमेस्टर में मैंने एक ऑफिस में बतौर इंटर्न ज्वाइन किया। जिसमें 30 लोगों का स्टॉफ था। एक सीनियर ने मेरा नंबर वॉट्सएप ग्रुप से निकालकर रात में मैसेज-कॉल करना शुरू किया। पहले मैं पहचान नहीं सकी, क्योंकि उनसे मेरा कभी सामना नहीं होता था। फिर वह मेरे संग ऑफिस में गलत हरकतें करने लगा। एक दिन में काम से ऑफिस में ही दूसरे सेक्शन में गई। इस दौरान वह पीछे से आया और गंदी बात की। विरोध किया तो उसने मुझे धमकाते हुए कॅरियर बर्बाद करने की धमकी देने लगा। इस घटना के बाद वहां मैनें इंटर्नशिप बंद कर दी।

केस -2

शिकायत की तो किया ट्रांसफर: सुधा कानन (बदला हुआ नाम) बताती है कि वह एक कार्यालय में काम करती हैं। यहां कार्य के दौरान एक सीनियर जो मेरे सेक्शन में नहीं थी वह अक्सर मेरे साथ लंच के वक्त मिलने की कोशिश करता। बाद में नजदीकियां बढ़ाने के लिए मुझे ऑफिस के बाहर मिलने और घूमने व खाने-पीने पर चलने को कहता था। फिर वह मेरे कपड़ों पर कमेंट करने लगा। इसके बाद उसने मेरे सहकर्मियों से बात करने पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की। हर कर्मचारी के बारे में उल्टी सीधी बातें करता और उनकी छवि खराब बताकर अपनी इमेज अच्छी बताने की कोशिश करता। उसकी हिम्मत बढ़ी तो वह कभी कभी दोअर्थी बातें करने लगा। जब इसका विरोध किया। तो उसने प्रोजेक्ट मैनेजर से कहकर मेरे कार्य के बारे में शिकायत करने लगा। यही नहीं उसने तरह-तरह के अवरोध पैदा किए। लेकिन हमारे मैनेजर्स अच्छे थे, उन्होंने उस कर्मचारी को ही बाहर कर दिया।

केस - 3

पसंद ना पसंद पूछते थे: रश्मि बदला हुआ नाम की कहानी भी इसी तरह की है। वह बताती हैं कि यहां पढ़ाई करने के लिए आई। फिर यहीं पर काम करना शुरू कर दिया। अभी तक तीन ऑफिस में काम कर चुकी हूं। अभी जिस ऑफिस में हूं, वहां पर एक कर्मचारी मुझे घूरता रहता था। इसके वह अक्सर मुझे ऑफिस टाइम कैंटीन व पास ही एक रेस्टोरेंट और पार्क में चलने के लिए कहता था। इसके बाद वह मुझसे हमेशा अनकंफर्ड करने वाले विषयों पर बात करता। मैंने हमेशा पाया कि वह कई विषयों पर बात करते हुए अपनी सोच को मुझ पर थोपने की कोशिश करता। साथ ही वह मेरी पसंद-नापसंद के बारे में अक्सर पूछता रहता था। जब उससे दूरी बनानी चाही, तो उसने अचानक से मेरे काम में कमियां निकालनी शुरू कर दीं। बाद में प्रोजेक्ट मैनेजर से शिकायतें करने पर उन्होंने दो माह पहले उसका ट्रांसफर कर दिया।

Also Read
View All

अगली खबर